मुख्य समाचार
ओवरकार्ट ने किताबों की दुनिया में रखा कदम
नई दिल्ली| ऑनलाइन मार्केटप्लेस ओवरकार्ट अब किताबों की भी बिक्री करने जा रही है। ओवरकार्ट अन्य ई-मार्केटप्लेस से अलग बचा हुआ माल, अनबॉक्स्ड माल, इस्तेमाल किए हुए और नए जैसे बनाए गए माल का विपणन करती है।
कंपनी नए जैसे बनाए हुए इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की बिक्री करती है और गैर इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में अपना विस्तार करने के लिए उसने अपने बोर्ड में इस्तेमाल की हुई किताबों की ऑनलाइन विक्रेता कंपनी मैडबुक्स डॉट कॉम के सह-संस्थापक शीष रोहिल को शामिल किया है।
रोहिल ने कहा, “किताबों का मूल्य उतनी तेजी से नहीं घटता, जितनी तेजी से इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का मूल्य घटता है और किताबों का मूल्य पढ़ लिए जाने के बाद भी बरकरार रहता है। इस मामले में भी आपूर्ति प्रतिष्ठित रिटेलरों के पास बचे हुए सामानों से होगी।”
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य ग्राहकों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण किताबें पढ़ने की सुविधा उपलब्ध कराना है।”
उन्होंने आगे कहा कि अगले सप्ताह लांचिंग के बाद किताबें तीन मूल्य श्रेणियों-49 रुपये, 99 रुपये और 149 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी।
अन्तर्राष्ट्रीय
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के अलावा चार और देशों से अपने राजदूत वापस बुलाए
ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, पुर्तगाल और संयुक्त राष्ट्र से बांग्लादेश के राजदूत वापस बुलाए गए हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद बांग्लादेश और भारत के संबंध कुछ खास नहीं रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय से जुड़े लोगों का मानना है कि प्रशासनिक प्रभाग के आदेश देश की विदेश नीति को लेकर अच्छे नहीं रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि भारत में उच्चायुक्त सहित जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, उनमें से कई राजनीतिक नियुक्तियां नहीं थीं।
भारत में उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान के अलावा जिन अन्य लोगों को वापस बुलाया गया है, उनमें न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि और ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम और पुर्तगाल में बांग्लादेश के राजदूत शामिल हैं। जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, वह आने वाले महीनों में रिटायर होने वाले थे। भारत में उच्चायुक्त रहमान भी इनमें शामिल हैं।
यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच नहीं हो पाई थी बैठक
बांग्लादेश में छात्र संगठनों के नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए। इसके कारण अगस्त की शुरुआत में शेख हसीना की सरकार गिर गई और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंध खराब स्थिति में हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कार्यवाहक प्रशासन ने हसीना के पद छोड़ने के कुछ दिनों बाद ही कार्यभार संभाल लिया। वहीं, हसीना ने बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत में शरण ली। ढाका में कार्यवाहक व्यवस्था ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक कराने के लिए लगातार प्रयास किए। हालांकि, यूनुस ने भारत की आलोचना की थी और शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया था। इससे भारतीय पक्ष नाखुश था और दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो पाई।
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