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खेल-कूद

जसप्रीत बुमराह तीनों फार्मेट के सबसे तेज गेंदबाज : माइकल क्लार्क

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नई दिल्ली। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क ने जसप्रीत बुमराह तीनों फार्मेट का सबसे सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज बताया है। बुमराह ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में शानदार गेंदबाजी करते हुए मैन ऑफ़ द सीरीज का खिताब अपने नाम किया था। बुमराह ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी के दौरान 13.06 की औसत से 32 विकेट लिए, लेकिन सिडनी में आख़िरी टेस्ट के ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के दौरान चोटिल हो गए। बुमराह की अनुपस्थिति में भारत के अन्य तेज़ गेंदबाज़ चार रन की बढ़त हासिल करने में कामयाब ज़रूर रहे, लेकिन दूसरी पारी में बुमराह की गैर-मौज़ूदगी में ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन 162 रन का लक्ष्य हासिल कर सीरीज 3-1 से जीत ली।

अगर बुमराह फ़िट होते एवं दो विकेट और ले लेते तो वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए किसी भी विदेशी गेंदबाज़ के द्वारा एक सीरीज़ में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बनते। यह रिकॉर्ड सिडनी बार्न्स के नाम पर हैं, जिन्होंने 1911-12 में 34 विकेट लिए थे। क्लार्क ने कहा, “इस सीरीज़ के ख़त्म होने के बाद जब मैं बुमराह के प्रदर्शन के बारे में सोच रहा था, तो मुझे लगा कि वह तीनों फ़ॉर्मेट में अब तक के सर्वश्रेष्ठ तेज़ गेंदबाज़ हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं बहुत से महान तेज़ गेंदबाज़ों को जानता हूं – जैसे कर्टली एम्ब्रोस, ग्लेन मैक्ग्रा लेकिन उन्होंने T20 क्रिकेट नहीं खेला है। इसलिए मैं उनके बारे में बात नहीं कर रहा। लेकिन जिन खिलाड़ियों ने भी तीनों फ़ॉर्मेट खेले हैं, उनमें बुमराह सबसे बेहतरीन हो सकते हैं। वह हर परिस्थिति में हर फ़ॉर्मेट में शानदार हैं। यही उन्हें महान बनाता है।”

सिडनी टेस्ट के बारे में क्लार्क ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत ने शायद 20 रन कम बनाया। अगर भारत द्वारा दिया गया लक्ष्य 180 होता और बुमराह टीम में होते, तो मुझे लगता है भारत मैच जीत जाता। बुमराह इतने अच्छे हैं कि वह टीम के अन्य गेंदबाज़ों से कहीं बेहतर हैं।” मोहम्मद सिराज ने भारतीय तेज़ गेंदबाजों में 31.15 की औसत से 20 विकेट लेकर दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने सिडनी में छह विकेट लेकर यह दिखाया कि उन्हें सीरीज़ में पहले मौका दिया जा सकता था।

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खेल-कूद

पूर्व भारतीय कोच कप्तान और महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ आज मना रहे हैं अपना 51वां जन्मदिन

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मुंबई। पूर्व भारतीय कोच, कप्तान और महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ का आज 51वां जन्म दिन हैं। 11 जनवरी 1973 को इंदौर में जन्मे राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट के मैदान पर ढेरों रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इनमें कुछ रिकॉर्ड ऐसे भी हैं, जिन्हें तोड़ पाना आसान नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में जब द्रविड़ मैदान पर बल्ला लेकर उतरते थे तो दुनिया का हर गेंदबाज कांप जाता था।

टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ लंबी पारियों के लिए जाने जाते थे। वे 10 -10 घाटे क्रीज़ पर टिके रहते थे और गेंदबाजों की हालत खस्ता कर देते थे। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। द्रविड़ ने अपने टेस्ट करियर में 31258 गेंदों का सामना किया है। इस दौरान उन्होंने कुल 736 घंटे क्रीज पर समय बिताया। शायद यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्‍तानों में शुमार स्टीव वॉ ने एक बार अपनी टीम से कहा था कि ’15 मिनट में द्रविड़ का विकेट लेना है और अगर ऐसा नहीं कर पाए तो बाकी 10 खिलाड़ियों को आउट करने के बारे में सोचना।’

वॉ का यह बयान बताता है कि द्रविड़ को आउट करना कितना मुश्किल था। राहुल की बल्लेबाजी के बारे में पाकिस्तान के दिग्गज तेज शोएब अख्तर ने कहा था, ‘द्रविड़ को गेंदबाजी करना सचिन से ज्यादा मुश्किल था। राहुल के डिफेंस को भेदना आसान नहीं था, इसीलिए उन्‍हें द वॉल कहा गया।’ अख्तर ने यह तक कहा था कि द्रविड़ नेट्स में भी आउट नहीं होते थे।’

द्रविड़ ने 17 साल की उम्र में कर्नाटक के लिए खेलना शुरू किया। राहुल ने 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में अपना टेस्ट डेब्यू किया। इस मैच में वे शतक से चूक गए थे और 95 पर आउट हुए थे। लॉर्ड्स में शतक बनाना द्रविड़ के लिए एक बड़े सपने जैसा था। जो उनके करियर के अंत में पूरा हुआ जब द्रविड़ ने अपने आखिरी इंग्लैंड दौरे पर इस मैदान पर शतक जड़ा।
द्रविड़ अपने क्रिकेट करियर में कभी गोल्डन डक पर आउट नहीं हुए। उन्‍होंने 164 टेस्ट मैचों में स्लिप में 210 कैच लपके जो एक रिकॉर्ड है। राहुल ने अपने करियर का एकमात्र टी20 मैच इंग्लैंड के खिलाफ साल 2011 में खेला था। इसमें उन्होंने 31 रन बनाए थे और लगातार तीन छक्के भी जड़े थे।

राहुल द्रव‍िड़ ने अपने करियर में कुल 164 टेस्ट मैचों की 286 पारियों में 52.31 के शानदार औसत से 13288 रन बनाए। इस दौरान दिग्गज बल्लेबाज ने 36 शतक और 63 अर्धशतक ठोके। वहीं वनडे क्रिकेट में द्रविड़ ने 344 मैचों की 318 पारियों में 39.17 की औसत से 10889 रन बनाए। वनडे में द्रविड़ ने 12 शतक और 83 अर्धशतक जड़े। द्रविड़ वनडे और टेस्ट में 10 हज़ार से ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे भारतीय हैं।

उनसे पहले यह कारनामा सचिन तेंदुलकर ने किया था।

साल 2021 में राहुल द्रविड़ को भारतीय टीम का हेड कोच बनाया गया, जिसमें टीम इंडिया का प्रदर्शन काफी शानदार देखने को मिला। विदेशी सरजमीं पर भी टेस्ट सीरीज में भारत ने इस दौरान काफी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। द्रविड़ की कोचिंग में क्रिकेट के इतिहास में पहली बार भारत तीनों फॉर्मेट में नंबर 1 रैंक पर आया। साल 2023 में भारत में खेले गए वर्ल्ड कप में भले ही भारतीय टीम को फाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा लेकिन पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया का एकतरफा प्रदर्शन देखने को मिला था।

लेकिन द्रविड़ यहीं नहीं रुके अंत में जाते -जाते वे 2024 में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीत ही गए और भारत ने 13 साल बाद आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म किया। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में वे राजस्थान रॉयल्स (RR) के कप्तान और कोच रेह चुके हैं। टीम इंडिया का कोच बनाने के बाद द्रविड़ को आईपीएल से दूर रहना पड़ा था। लेकिन अब द्रविड़ आईपीएल 2025 में एकबार फिर से राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए हेड कोच की भूमिका में दिखाई देंगे।

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