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डेंगू पर सख्त हुए अखिलेश, अस्पतालों में चिकित्सा दुरूस्त करने के निर्देश

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अखिलेश

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अखिलेशलखनऊ| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी अस्पतालों में अपातकालीन चिकित्सा सुविधा को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार की ओर से शुक्रवार शाम को जारी आधिकारिक बयान में अपातकालीन सेवा पर तैनात चिकित्सकों तथा स्टाफ की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित किए जाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने जीवन-रक्षक दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को अस्पतालों की अपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की जांच के लिए निरीक्षण करने को कहा है। अखिलेश ने जिलाधिकारियों को डेंगू रोग के उपचार के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डेंगू के उपचार व बचाव के संबंध में कार्य योजना तैयार कर संबंधित जिलाधिकारी से अनुमोदित करवाएं और उसके अनुसार कार्रवाई करें।

उन्होंने रोग से बचाव के संबंध में लोगों को जागरूक किए जाने पर बल देते हुए कहा है कि सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में डेंगू रोग के संबंध में विशेष जन-जागरण अभियान चलाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देशों का कड़े तौर से अनुपालन सुनिश्चित किए जाने की अपेक्षा करते हुए अधिकारियों को सचेत किया कि इस संबंध में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रादेशिक

देवताल-माणापास लोक विरासतीय यात्रा-2024 सम्पन्न

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वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रशेखर जोशी की रिपोर्ट

लोक विरासतीय देवताल- माणापास लोकयात्रा आज सम्पन्न हो गयी। 2015 से उत्तराखंड के पूर्व केबिनेट मंत्री स्व. मोहनसिंह रावत “गांववासी” द्वारा शुरू की गई इस यात्रा को प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। शुक्रवार सुबह बदरीनाथ धाम से लोकयात्रा ने प्रस्थान किया। जय बदरीविशाल के जयघोष के साथ यात्रा बदरीधाम से 55 किमी दूर उच्च हिमालय स्थित माणापास-देवताल पहुंची।

देवताल में तीर्थयात्रियों ने पूजा-अर्चना की और अपने पितरों को भी पवित्र सरोवर का जल अर्पण किया। इस बार प्रशासन ने 54 लोगों को यात्रा पर जाने की अनुमति दी थी। आईटीबीपी और सेना के जवानों ने तीर्थ यात्रियों को रास्तेभर सुविधा दी और जलपान-भोजन का भी इंतज़ाम किया था।

देवताल चमोली गढवाल में देश की सबसे ऊंचाई की झील है। लगभग 18000 फ़ीट पर इसी पवित्र सरोवर से देवनदी सरस्वती का उद्गम है। माना जाता है कि देवताल में देवता स्नान करते हैं। 1962 से पूर्व भारत-तिब्बत व्यापार का यह प्रमुख रास्ता था। लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसको बंद कर दिया गया था।

इस अवसर पर प्रोफे.सुभाष चंद्र थलेडी ने बताया कि देवताल-माणापास से कैलाश मानसरोवर के रास्ते को खोलने के लिए सरकार को विचार करना चाहिए, क्योंकि यह रास्ता नजदीक और सुगम है। साथ ही सीमा तक सड़क मार्ग से जुड़ा है। इससे तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी। इसी के साथ देवताल जाने के लिए भी स्थानीय तीर्थ यात्रियों को सुगमता से जाने-आने की सुविधा भी दी जानी चाहिए।

देवताल में पूर्व मंत्री स्व.मोहनसिंह रावत के नेतृत्व में बने हनुमान मंदिर में। भी पूजा अर्चना की गई। “गांववासी अमर रहे’ के नारों से देवताल गूंज उठा।

पंडित भास्कर डिमरी के संयोजन में इस यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा में बी.डी. सिंह, प्रोफे. (डॉ.) सुभाष चंद्र थलेडी, डॉ. श्रीनंद उनियाल, पंकज डिमरी, अभिषेक भंडारी, दीपा रौथाण, संजीव रौथाण, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. चेतना पुरोहित, सिद्धार्थ उनियाल, पंकज हटवाल आदि समेत लगभग चार दर्जन यात्री शामिल हुए।

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