नई दिल्ली। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार देर रात दिल्ली की साकेत कोर्ट में पेश किया, जहां अदालत ने उन्हें 13 दिनों की ईडी रिमांड में भेज दिया। यह कार्रवाई दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के तहत की गई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) शीतल चौधरी प्रधान ने बुधवार रात करीब एक बजे आदेश जारी करते हुए कहा कि ईडी ने पीएमएलए के सभी प्रावधानों का पालन किया है और आरोप की गंभीरता को देखते हुए लंबी अवधि की हिरासत आवश्यक है।
फर्जी मान्यता और भारी-भरकम फंडिंग का खुलासा
ईडी की रिमांड नोट के अनुसार, यूनिवर्सिटी पर फर्जी मान्यता, भ्रामक दावों और छात्रों को गुमराह करके करोड़ों रुपए इकट्ठा करने के आरोप हैं।
आईटीआर के विश्लेषण में सामने आया:
2014–15 में आय: 30.89 करोड़ (स्वैच्छिक योगदान बताया गया)
2015–16 में आय: 29.48 करोड़
2016–17 के बाद आय को सीधे एजुकेशनल रेवेन्यू के रूप में दिखाया जाने लगा
2018–19 में आय: 24.21 करोड़
2024–25 में आय: 80.01 करोड़
जांच में दावा किया गया कि संस्था ने फर्जी मान्यता के नाम पर लगभग 415.10 करोड़ रुपये जुटाए।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप
एजेंसियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने वर्षों तक झूठे दावों, गैरकानूनी प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों के जरिए छात्रों से भारी फीस वसूली। इससे न सिर्फ छात्रों का विश्वास टूटा बल्कि उनके करियर और भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ा।
मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की गहन जांच
इस केस की शुरुआत दिल्ली पुलिस की दर्ज एफआईआर से हुई थी। अब ईडी इस पूरे नेटवर्क और पैसों के प्रवाह की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कर रही है। पूछताछ के दौरान कई और अहम खुलासों की संभावना जताई जा रही है।