रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव – कानपुर
कानपुर। शहर में अपराध की दुनिया पर नकेल कसने के लिए कमिश्नरेट पुलिस लगातार सक्रिय है। गैंगस्टर एक्ट के तहत रजिस्टर्ड इंटररेंज-9 गैंग के सरगना दीनू उपाध्याय (धीरज उपाध्याय) के भतीजे मनु उपाध्याय के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से फरार चल रहे मनु के घर पर सोमवार को कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया गया। साथ ही पूरे इलाके में डुगडुगी बजवाकर मुनादी कराई गई, जिसमें मनु को 30 दिनों के अंदर अदालत में आत्मसमर्पण करने की ठोस चेतावनी दी गई। मुनादी करने गयी पुलिस ने कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा में वह हाजिर नहीं होता है, तो उसके खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे की जांच कर रहे इंस्पेक्टर संजय राय की टीम ने की। इंस्पेक्टर संजय राय ने बताया कि मनु उपाध्याय पर गंभीर आरोप हैं और कोर्ट के बार-बार समन जारी करने के बावजूद वह अदालत में पेश नहीं हो रहा है। इसलिए कोर्ट के आदेश पर यह कदम उठाया गया है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों को किसी भी कीमत पर कानून के शिकंजे में लाया जाएगा, ताकि शहर में अपराध पर अंकुश लग सके।
बताते चले यह पूरा मामला वर्ष 2022 का है, जब लाल बंगला, कांजीहेड़ा निवासी मनोज कुमार गुप्ता ने दीनू उपाध्याय, उसके भतीजे मनु उपाध्याय और अन्य साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस दौरान पीड़ित ने शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन लोगों ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की और 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। इस मामले में क्राइम ब्रांच की टीम ने मनु उपाध्याय को प्रयागराज से गिरफ्तार किया था। हालांकि, जमानत मिलने के बाद से वह फरार हो गया और अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।
बता दें कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने दीनू और उसके साथियों को इंटररेंज-9 गैंग के रूप में रजिस्टर्ड किया है, जिसमें दीनू को गैंग लीडर घोषित किया गया है। इस गैंग में भाजपा नेता अमन शुक्ला, रचित पाठक सहित कुल 25 सदस्य शामिल बताए जाते हैं। इनमें से कई पर जमीन कब्जाने, रंगदारी वसूलने, धमकी देने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर आरोप हैं। अब तक गैंग के 9 सदस्य जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि कुछ ने अग्रिम जमानत ले ली है और बाकी फरार हैं। दीनू खुद विभिन्न मामलों में जेल में बंद है, लेकिन उसके गैंग के सदस्य अभी भी सक्रिय माने जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दीनू गैंग ने वकालत की आड़ में कई लोगों की संपत्तियों पर कब्जा किया और फर्जी रजिस्ट्री कराकर ठगी की। कई शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं, जिसमें आरोपियों ने पुलिस से करीबी होने का हवाला देकर लोगों को धमकाया। कमिश्नरेट पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। फरार सदस्यों पर इनाम घोषित करने से लेकर उनकी संपत्ति कुर्क करने तक हर संभव कदम उठाया जा रहा है।
मनु उपाध्याय की यह कार्रवाई अन्य फरार सदस्यों के लिए भी चेतावनी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गैंग के बाकी सदस्यों के ठिकानों पर भी जल्द दबिश दी जाएगी। शहरवासियों में इस कार्रवाई से राहत की लहर है, क्योंकि दीनू गैंग के आतंक से कई लोग प्रभावित थे। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी फरार आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा और अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाई जाएगी।