रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव कानपुर
कानपुर : शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से परेशान लोग अब कुछ राहत की सांस ले सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त आदेश के बाद कानपुर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। उन कुत्तों को जो दो या उससे अधिक बार लोगों को काट चुके हैं, उन्हें अब ‘उम्रकैद’ की सजा दी जा रही है। इसका मतलब है कि ऐसे खतरनाक कुत्तों को अब हमेशा हमेशा के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर में रखा जाएगा। कानपुर में अभी तक 4 से 5 ऐसे कुत्तों को पकड़कर ABC सेंटर में बंद कर दिया गया है, जहां उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
यह कार्रवाई योगी सरकार के उस आदेश पर आधारित है, जो सितंबर महीने में जारी किया गया था। आदेश के अनुसार, अगर कोई आवारा कुत्ता पहली बार किसी को काटता है तो उसे 10 दिनों के लिए ABC सेंटर में रखकर ईलाज किया जाएगा। इस दौरान कुत्ते की नसबंदी की जाएगी, एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जाएगी और उसके शरीर में माइक्रोचिप डाली जाएगी। इसके बाद उसे उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा। लेकिन अगर वही कुत्ता दोबारा बिना उकसावे के किसी पर हमला करता है और काटता है, तो उसे आजीवन ABC सेंटर में रखा जाएगा। यह ‘उम्रकैद’ तभी खत्म होगी जब कोई व्यक्ति कानूनी रूप से उसे गोद लेने के लिए आगे आए। गोद लेने वाले को शपथ-पत्र देना होगा कि वह कुत्ते को सड़क पर नहीं छोड़ेगा और माइक्रोचिप से उसकी मॉनिटरिंग होती रहेगी।
कानपुर में यह कार्रवाई इसलिए चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि इसमें कुछ पालतू कुत्ते भी शामिल हैं, जो अपने मालिकों के साथ रहते हुए भी आक्रामक व्यवहार दिखा रहे थे। चीफ वेटरनरी ऑफिसर (CVO) डॉ. आरके निरंजन ने बताया कि नगर निगम की टीम लगातार आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चला रही है। ABC सेंटर में बंद कुत्तों को अच्छा खाना, पानी और देखभाल मुहैया कराई जा रही है। डॉ. निरंजन ने कहा, “हमारा मकसद कुत्तों की आबादी नियंत्रित करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हिंसक कुत्तों को सड़कों पर छोड़ना खतरा पैदा कर सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। शहरवासियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली है। एक तरफ जहां लोग कुत्तों के हमलों से राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं पशु प्रेमी इसे क्रूरता बता रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि कुत्तों को मारने के बजाय नसबंदी और वैक्सीनेशन से समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है। लेकिन बढ़ते डॉग बाइट मामलों को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। कानपुर में हर साल हजारों डॉग बाइट के केस दर्ज होते हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
नगर निगम अब अभियान को और तेज करने की योजना बना रहा है। तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जा रही है, जिसमें पशु चिकित्सक, नगर निगम प्रतिनिधि और एसपीसीए सदस्य शामिल होंगे। यह कमेटी जांच करेगी कि काटने की घटना में कुत्ते को उकसाया तो नहीं गया। अगर कुत्ता बिना वजह हमलावर पाया जाता है, तो ही उसे आजीवन कैद की सजा मिलेगी।
यह नियम पूरे उत्तर प्रदेश में लागू है और अन्य शहरों जैसे प्रयागराज, लखनऊ में भी ऐसे कुत्तों को ABC सेंटर में रखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोचिपिंग से कुत्तों की ट्रैकिंग आसान हो जाएगी और भविष्य में हमलों को रोका जा सकेगा। कुल मिलाकर, यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उठाया गया है, लेकिन पशु कल्याण के साथ संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।