भोपाल। मध्य प्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों दूषित पेयजल की गंभीर त्रासदी से जूझ रहा है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल आपूर्ति लाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। दूषित पानी पीने से अब तक 13 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं।
पानी की सैंपल जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भागीरथपुरा में नर्मदा लाइन से सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूनों में फीकल कॉलीफॉर्म, ई-कोलाई और क्लेब्सिएला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। कुछ सैंपल में विब्रियो कोलेरी जैसे तत्व भी मिले हैं, जो हैजा रोग से जुड़े होते हैं।
जानकारी के अनुसार अब तक 80 पानी के सैंपल की जांच कराई गई है, जिनमें से कुछ की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। शेष रिपोर्ट अगले 1 से 2 दिनों में आने की संभावना है। सभी नमूनों की जांच एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब में की गई है। बताया गया है कि इलाके की मुख्य पेयजल पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है और लीकेज के कारण सीवेज का पानी पाइपलाइन में मिल गया।
दूषित पानी के सेवन से अब तक 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में इलाजरत हैं। अब तक कुल 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। हालांकि मौतों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, 13 मौतों की बात कही जा रही है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस मामले को लेकर वार्ड 11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि नर्मदा की नई पाइपलाइन की फाइल 12 नवंबर 2024 को तैयार हो गई थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे सात महीने तक लंबित रखा। दबाव पड़ने पर 30 जुलाई 2025 को टेंडर जारी किया गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं किया गया।
कमल वाघेला ने यह भी बताया कि नागरिकों द्वारा विधायक, पार्षद और महापौर से कई बार शिकायतें की गई थीं। 311 और सीएम हेल्पलाइन पर भी लंबे समय से शिकायतें दर्ज थीं। महापौर ने अमृत योजना के फंड का इंतजार किए बिना तुरंत पाइपलाइन कार्य शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने आदेशों की अनदेखी की। 29 दिसंबर 2025 को जब क्षेत्र में बीमारी फैली, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।