अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरानी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की गई तो अमेरिका हस्तक्षेप के लिए तैयार है।
यह बयान ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य हिस्सों में आर्थिक संकट के कारण भड़के बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है। इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें हिंसक रूप से मारता है, जैसा कि उनकी आदत है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। हम पूरी तरह तैयार हैं।” उन्होंने अपने संदेश के अंत में इसे गंभीरता से लेने के लिए धन्यवाद भी दिया।
कैसे शुरू हुए विरोध प्रदर्शन
ईरान में ये विरोध प्रदर्शन शुरुआत में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और अन्य आर्थिक समस्याओं को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे इनका दायरा बढ़ता गया और प्रदर्शनकारियों ने देश की धर्मतांत्रिक सरकार के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
देश अभी भी जून में इजराइल के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के असर से उबर रहा है। इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था। बाद में ईरान ने घोषणा की कि उसने अपने सभी परमाणु स्थलों पर यूरेनियम संवर्धन रोक दिया है, जिसे पश्चिमी देशों के साथ प्रतिबंधों में ढील के लिए संभावित बातचीत का संकेत माना जा रहा है।
हालांकि अब तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू न करने की चेतावनी दी है।
ग्रामीण इलाकों तक फैले प्रदर्शन
गुरुवार को ये विरोध प्रदर्शन तेहरान से निकलकर ईरान के कई ग्रामीण प्रांतों तक फैल गए। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई। ये मौजूदा आंदोलन में दर्ज की गई पहली मौतें हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ये मौतें सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अधिक सख्त और आक्रामक रुख का संकेत हो सकती हैं। हालांकि तेहरान में प्रदर्शन कुछ हद तक धीमे पड़े हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में इनकी तीव्रता बढ़ी है। बुधवार को दो और गुरुवार को पांच लोगों की मौत चार अलग-अलग शहरों में हुई, जहां बड़ी संख्या में लूर जातीय समुदाय के लोग रहते हैं।
2022 के बाद सबसे बड़ा आंदोलन
ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में देखे गए सबसे बड़े आंदोलनों में से हैं। उस समय 22 वर्षीय महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में व्यापक प्रदर्शन हुए थे। हालांकि मौजूदा आंदोलन अभी उस स्तर या तीव्रता तक नहीं पहुंचा है, लेकिन हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।