अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को सीधे निशाने पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है, जो रूस से तेल खरीदकर उसकी युद्ध गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। इस लिस्ट में भारत और चीन का नाम प्रमुखता से शामिल है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले द्विदलीय विधेयक को समर्थन दे दिया है। इस विधेयक के तहत भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव डाला जा सकता है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद रहे हैं। हालांकि, विधेयक अभी पारित नहीं हुआ है और अगले सप्ताह इसका द्विदलीय मतदान होने की संभावना है। ग्राहम ने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि इस विधेयक से उन देशों को दंडित किया जाएगा जो “पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन” उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम समय की मांग है क्योंकि रूस अब भी सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है।
रूस पर प्रतिबंध अधिनियम 2025
अमेरिकी कांग्रेस के अनुसार, इस विधेयक का शीर्षक “रूस पर प्रतिबंध अधिनियम 2025” है। इसमें रूस से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान हैं। प्रमुख प्रावधानों में रूस से अमेरिका में आयातित वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क को उनके मूल्य का कम से कम 500 प्रतिशत तक बढ़ाना शामिल है।
ट्रम्प का दावा और भारत की प्रतिक्रिया
ट्रम्प ने पहले दावा किया था कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण अमेरिकी उच्च टैरिफ से नाखुश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी चिंताओं का समाधान नहीं करता, तो टैरिफ और बढ़ सकता है। भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी कोई बात नहीं कही कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। नई दिल्ली ने कहा कि उसके ऊर्जा संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय मार्केट की परिस्थितियों के आधार पर लिए जाते हैं।