लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक अब्बास अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने पहले दी गई अंतरिम जमानत को अब नियमित जमानत में तब्दील कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम जमानत के दौरान अब्बास अंसारी का व्यवहार संतोषजनक रहा, इसी आधार पर उन्हें स्थायी राहत दी जा रही है।
हालांकि, अदालत ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी तय की हैं। आदेश के मुताबिक, अब्बास अंसारी को उत्तर प्रदेश से बाहर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचना देनी होगी। इसके अलावा, वे कानून-व्यवस्था या जांच प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट नहीं डालेंगे और अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन करेंगे।
बचाव पक्ष की दलीलें
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। अब्बास अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और निजाम पाशा ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अब्बास लंबे समय से जेल में हैं, मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और मुकदमे के निपटारे में अभी समय लग सकता है। ऐसे में उन्हें जमानत दिया जाना उचित है।
अब्बास अंसारी को 4 नवंबर 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था। बाद में, 31 अगस्त 2024 को चित्रकूट के कर्वी कोतवाली थाने में उनके खिलाफ जबरन वसूली और मारपीट का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 6 सितंबर 2024 को उन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट को छोड़कर बाकी सभी मामलों में उन्हें जमानत दे दी थी। अब ताजा आदेश में अदालत ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी उन्हें राहत देते हुए रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है।