अयोध्या। अयोध्या में यूजीसी को लेकर जारी विरोध अब और तेज होता नजर आ रहा है। देशभर में इस नियमावली के खिलाफ माहौल बना हुआ है और अलग-अलग हिस्सों से इसे वापस लेने की मांग उठ रही है। इसी कड़ी में धर्म नगरी अयोध्या में भी आम लोगों के साथ साधु-संतों ने खुलकर विरोध जताया है।
अयोध्या की प्राचीन तपस्वी जी की छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर यूजीसी की नई नियमावली को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि यदि 40 दिनों के भीतर इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो वे प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगेंगे।
जगतगुरु परमहंस आचार्य का कहना है कि उन्होंने यह पत्र गहरे असंतोष और पीड़ा के साथ लिखा है। उनके अनुसार, सरकार को या तो यूजीसी के नए नियमों को तत्काल वापस लेना चाहिए या फिर उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने देश की एकता और अखंडता के लिए वर्षों तक काम किया, लेकिन यह नियमावली उन प्रयासों को कमजोर करती प्रतीत होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों से सामाजिक असंतुलन बढ़ेगा, जातिवाद को बढ़ावा मिलेगा और समाज में टकराव की स्थिति बन सकती है। उनका यह भी कहना है कि इससे निर्दोष लोगों के साथ अन्याय होने की आशंका है और सामाजिक सौहार्द को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
जगतगुरु ने यह भी कहा कि वे खुद को भाजपा का कट्टर समर्थक मानते हैं और पार्टी का पतन अपनी आंखों से नहीं देख सकते। उनके मुताबिक, यूजीसी की नई नियमावली से न केवल हिंदू समाज कमजोर होगा बल्कि इसका राजनीतिक असर भी पड़ेगा और भाजपा को देशभर में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अपने बयान के अंत में उन्होंने दोहराया कि वे देश में आपसी वैमनस्य और हिंसा की स्थिति नहीं देखना चाहते। इसलिए उनकी प्रधानमंत्री से अपील है कि या तो इस कानून को वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए, ताकि देश और समाज को टूटते हुए देखने का दुख उन्हें न सहना पड़े।