जोधपुर। जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने इसे तहकीकात के लिए विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपा है। तीन सदस्यीय SIT की अगुवाई एसीपी छवि शर्मा कर रही हैं। टीम में बोरनाडा थाने के इंचार्ज शकील अहमद और एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी निष्पक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ की जाएगी और सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
साध्वी प्रेम बाईसा का कल (30 जनवरी) उनके पैतृक गांव परेऊ (जिला बालोतरा) में विधि-विधान के साथ समाधि संस्कार किया गया। उनके असामयिक निधन से गांव में शोक का माहौल है। साध्वी प्रेम बाईसा 12 साल की उम्र से धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर थीं और 25 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु, संत और ग्रामीण पहुंचे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साध्वी मंगलवार (27 जनवरी) को अजमेर से कथा पूरी करके जोधपुर के आरती नगर आश्रम लौट रही थीं। लौटने के बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। कंपाउंडर ने तत्काल उपचार किया, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पाल रोड के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने पोस्टमार्टम और विसरा जांच के बाद शव परिजनों को सौंपा। बुधवार (28 जनवरी) को उनका पार्थिव शरीर जोधपुर से परेऊ लाया गया और शुक्रवार (30 जनवरी) को समाधि संस्कार संपन्न हुआ। स्थानीय लोग बताते हैं कि साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन भक्ति, साधना और संघर्ष से भरा रहा। 5 साल की उम्र में मां के निधन के बाद वे जोधपुर के आश्रम में रहने लगीं और संतों के मार्गदर्शन में कथा वाचन और भजन गायन में ख्याति प्राप्त की।