बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव अदालत की कार्यवाही के दौरान मौजूद थे। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्धारित समयसीमा के भीतर गुरुवार शाम 4 बजे तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।
सरेंडर की समयसीमा बढ़ाने की मांग खारिज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजपाल यादव ने सरेंडर की समयसीमा बढ़ाने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि 50 लाख रुपये की व्यवस्था कर ली गई है और शेष भुगतान के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय चाहिए।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति को उसके सामाजिक या पेशेवर बैकग्राउंड के आधार पर विशेष रियायत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने क्यों दिखाई सख्ती?
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव ने समझौते की बकाया राशि चुकाने को लेकर दिए गए वादों का बार-बार उल्लंघन किया है। इसी वजह से पहले दी गई राहत को वापस लेते हुए कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी 2026 शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत पहले ही इस मामले में सजा सुना चुकी थी और हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।
क्या है राजपाल यादव का चेक बाउंस केस?
यह मामला साल 2010 का है। राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई, जिसके बाद कर्ज चुकाने में देरी होती चली गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। अब हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अभिनेता को जेल जाना पड़ा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।