नई दिल्ली/पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने प्रशांत किशोर को कड़ी टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।
दरअसल, हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की नवगठित पार्टी जन सुराज ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे अवैध करार दिया और दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी।
इसी मांग को लेकर जन सुराज पार्टी ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 6 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने सवाल किया कि आपकी पार्टी को कितने वोट मिले और जब जनता ने नकार दिया, तो क्या आप लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का सहारा ले रहे हैं?
याचिका में आरोप लगाया गया था कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य सरकार ने गैरकानूनी तरीके अपनाए। इसमें दावा किया गया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद महिला मतदाताओं के खातों में 10,000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आया और हाई कोर्ट क्यों नहीं गया।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी की याचिका खारिज करते हुए प्रशांत किशोर को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। इससे बिहार की राजनीति में सक्रिय प्रशांत किशोर को एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।