नई दिल्ली। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ईरान की एक अदालत ने उन्हें 7 साल की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है और साथ ही 2 साल का यात्रा प्रतिबंध भी लगाया गया है। यह जानकारी उनके वकीलों और समर्थकों ने दी है, हालांकि ईरान सरकार की ओर से अभी तक इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
समर्थकों का कहना है कि यह सजा महिलाओं के अधिकारों और आज़ादी के लिए आवाज उठाने की वजह से दी गई है। बताया जा रहा है कि जेल में रहते हुए नरगिस मोहम्मदी ने अपनी कथित गैरकानूनी गिरफ्तारी, जेल की खराब परिस्थितियों और राजनीतिक कैदियों के साथ हो रहे व्यवहार के विरोध में भूख हड़ताल शुरू की थी। समर्थकों का दावा है कि इसी के बाद उनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई की गई।
नरगिस मोहम्मदी के वकील मुस्तफा नीली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि अदालत ने ‘साजिश रचने और एकत्र होने’ के आरोप में 6 साल की सजा सुनाई है, जबकि ‘सरकार विरोधी प्रचार’ के मामले में उन्हें डेढ़ साल की जेल और 2 साल का यात्रा प्रतिबंध दिया गया है।
नरगिस मोहम्मदी एक लेखिका और जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वह मानवाधिकार रक्षक केंद्र (DHRC) की उप निदेशक भी रह चुकी हैं। पिछले लगभग तीन दशकों से वह ईरान में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। अब तक उन्हें 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है और पहले ही कुल 31 साल की जेल सजा सुनाई जा चुकी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में ईरान में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उस समय वह जेल में थीं, इसलिए उनके बच्चों ने उनकी ओर से यह पुरस्कार ग्रहण किया था। नरगिस मोहम्मदी को ईरान सरकार की सबसे मुखर और साहसी आलोचकों में गिना जाता है।