वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले State of the Union संबोधन में भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने समय रहते दखल नहीं दिया होता तो शहबाज शरीफ की जान जा सकती थी और दोनों देशों के बीच परमाणु टकराव की स्थिति बन सकती थी।
कांग्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अपने पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ संघर्षों को खत्म कराया। उन्होंने बिना विस्तृत विवरण दिए कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के दौरान हालात बेहद गंभीर थे। उनके अनुसार, “अगर मैं दखल नहीं देता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मारे जा सकते थे और स्थिति न्यूक्लियर युद्ध तक पहुंच सकती थी।”
सीजफायर का फिर लिया श्रेय
ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का श्रेय अपने प्रशासन को दिया। उन्होंने दावा किया कि ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ जैसे आर्थिक उपायों के जरिए दोनों देशों पर दबाव बनाया गया, जिससे तनाव कम हुआ। हालांकि भारत पहले ही इस तरह के दावों को खारिज कर चुका है और किसी बाहरी मध्यस्थता से इनकार करता रहा है।
दूसरे कार्यकाल का पहला संबोधन
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का यह पहला ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ भाषण था, जिसमें उन्होंने अपने एक साल की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश में “अभूतपूर्व बदलाव” आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कभी भी “उस स्थिति में वापस नहीं जाएगा, जहां वह पहले था।” अमेरिका के संस्थापक आदर्शों का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने कहा कि 1776 से अब तक हर पीढ़ी ने जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज की रक्षा की है और अब उनकी पीढ़ी की बारी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब उन्होंने दोबारा पद संभाला तब देश संकट में था, लेकिन अब संयुक्त राज्य अमेरिका पहले से अधिक मजबूत और समृद्ध हो चुका है। उन्होंने अपनी टैरिफ नीति का बचाव करते हुए दावा किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रही है।
ट्रंप के इन दावों पर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है, खासकर भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर किए गए उनके दावों को लेकर।