श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की लंबे समय से प्रतीक्षित गिनती और सूचीकरण की प्रक्रिया बुधवार से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई। इस महत्वपूर्ण कार्य को तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार पूरा किया जा रहा है। रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने बताया कि केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। प्रशासन के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर के नियमित अनुष्ठान और श्रद्धालुओं के दर्शन प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, आंतरिक हिस्से ‘भीतर काठ’ से दर्शन पर फिलहाल रोक लगाई गई है और श्रद्धालु ‘बाहरा काठ’ से ही भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
निर्धारित शुभ मुहूर्त पर सुबह लगभग 11:18 बजे अधिकारी मंदिर में प्रवेश कर रत्न भंडार तक पहुंचे। जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने कहा कि यह कार्य लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ था और अब भगवान की संपत्ति का लिखित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले हुई थी, जिसका आज से औपचारिक क्रियान्वयन शुरू हुआ है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रत्न भंडार के भीतर दो टीमें काम करेंगी—एक सुपरवाइजरी ग्रुप और दूसरी हैंडलिंग ग्रुप। इन टीमों में जेमोलॉजिस्ट, जौहरी, बैंक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शामिल हैं। पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
इस दौरान मंदिर के आभूषणों की गिनती, उनका वजन और पहचान की जा रही है। बाद में इनका मिलान वर्ष 1978 के रिकॉर्ड से किया जाएगा। सटीकता सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है और प्रत्येक आभूषण की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के साथ डिजिटल दस्तावेज तैयार किया जा रहा है।
सेवायत डॉ. सरत महांति ने कहा कि यह कार्य लंबे समय से प्रतीक्षित था और अब गिनती के साथ-साथ टेबुलेशन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि पहले भगवान के दैनिक उपयोग में आने वाले आभूषणों का आकलन किया जाएगा, इसके बाद अन्य आभूषणों की गणना की जाएगी। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से जारी रहेगी।