अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान पात्र में कथित गबन के आरोपों को लेकर रविवार को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया, हालांकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
सूत्रों के हवाले से पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि राम मंदिर के दान पात्र की गिनती के दौरान वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। दावा किया गया कि देर रात तक मंदिर परिसर में जांच चली और चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। साथ ही एक वरिष्ठ अधिकारी को ट्रस्ट की ओर से कार्यमुक्त किए जाने की भी चर्चा रही।
हालांकि कुछ समय बाद पुलिस और ट्रस्ट दोनों की ओर से इन दावों का खंडन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही किसी से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों ने मीडिया में चल रही ऐसी खबरों को भ्रामक बताया। इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि दान पात्र और हुंडी काउंटिंग रूम का समय-समय पर नियमित ऑडिट किया जाता है। वर्तमान में भी सामान्य ऑडिट प्रक्रिया जारी है और अब तक किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता सामने नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ खबरों में एसबीआई से जुड़े चार कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने और रिकवरी होने का दावा किया गया था, लेकिन पुलिस ने ऐसे किसी घटनाक्रम से इनकार किया है। प्रशासन का कहना है कि यह ट्रस्ट की आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे गलत तरीके से पेश किया गया।
वहीं, इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि यह ट्रस्ट से जुड़ा विषय है, सरकार से नहीं। उन्होंने अखिलेश यादव के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि हर राजनीतिक बयान का जवाब देना जरूरी नहीं है। फिलहाल ट्रस्ट का कहना है कि ऑडिट प्रक्रिया नियमित रूप से जारी है और अब तक किसी वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले को लेकर सामने आए दावों और आधिकारिक बयानों के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।