बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की जेल भेजने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि अभिनेता को कई अवसर दिए गए, लेकिन उन्होंने अपने वादों का पालन नहीं किया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने राजपाल यादव की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले के दौरान आरोपी का आचरण संतोषजनक नहीं रहा और उनका रवैया भरोसे के योग्य नहीं पाया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। वर्ष 2010 में फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद वह तय समय पर कर्ज नहीं चुका सके। भुगतान के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके चलते उनके खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
बार-बार मिला मौका, लेकिन नहीं निभाया वादा
मई 2024 में सेशंस कोर्ट ने एक चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके वकील के इस आश्वासन पर सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी कि दोनों पक्ष समझौते के जरिए विवाद का समाधान कर लेंगे। मामला मध्यस्थता केंद्र भी भेजा गया। हालांकि, अदालत ने पाया कि राजपाल यादव लगातार भुगतान का आश्वासन देते रहे, लेकिन तय रकम जमा नहीं कर सके। उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये किस्तों में चुकाने का वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया।
पहले सरेंडर, फिर मिली राहत, अब फिर जेल
इसी साल फरवरी में हाईकोर्ट ने पूर्व आदेशों का पालन न करने पर राजपाल यादव को जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था। अतिरिक्त समय की उनकी मांग अदालत ने खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को सरेंडर किया। बाद में 1.5 करोड़ रुपये जमा करने पर उन्हें अंतरिम राहत देते हुए सजा निलंबित कर दी गई थी। लेकिन अदालत के अनुसार, इसके बाद भी उन्होंने अपने वित्तीय दायित्व पूरे नहीं किए। इसी वजह से दिल्ली हाईकोर्ट ने अब उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए तीन महीने की जेल भेजने का आदेश जारी किया है।