पटना: बिहार सरकार ने पंचायत व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन (सीमांकन) कराने को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर शुल्क लगाने का भी फैसला किया गया। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि पंचायतों के नए परिसीमन से स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी, विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और जनसंख्या के अनुरूप संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों के पुनर्गठन से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, स्थानीय प्रतिनिधित्व अधिक प्रभावी होगा और क्षेत्रीय विकास में संतुलन आएगा। साथ ही लोगों को सरकारी सुविधाएं अधिक सुगमता से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग और दुकानों पर लगेगा शुल्क
कैबिनेट बैठक में कुल 25 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें पंचायती राज विभाग का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी शामिल रहा। सरकार ने ‘ग्राम पंचायत कर दर एवं शुल्क नियमावली-2026’ के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अपने स्वयं के वित्तीय संसाधन विकसित करने में सक्षम बनाना और राज्य सरकार पर वित्तीय निर्भरता कम करना है। नई नियमावली के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र में होल्डिंग (संपत्ति) पर शुल्क लगाया जाएगा। इसके अलावा पंचायत क्षेत्र में संचालित दुकानों, व्यापार, उद्योग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से भी निर्धारित दर के अनुसार शुल्क वसूला जाएगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पंचायतों की आय बढ़ेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।