देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेड इन उत्तराखंड’ विजन को साकार करने के लिए तेजी से काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि वेडिंग और इवेंट इंडस्ट्री के सहयोग से उत्तराखंड को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख डेस्टिनेशन वेडिंग हब के रूप में स्थापित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री बुधवार को मसूरी-देहरादून मार्ग स्थित पुनर्नवा वेलनेस रिजॉर्ट, किमाड़ी में आयोजित ‘ग्रेस हिन्दुस्थान 2.0 उत्तराखंड’ राष्ट्रीय वेडिंग प्रोफेशनल्स सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल कन्वेन्शन ऑफ इवेंट इंडस्ट्रीज (ICEI) द्वारा किया गया।
पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
धामी ने कहा कि दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से आए वेडिंग प्लानर्स, इवेंट विशेषज्ञ, पर्यटन उद्यमी और निवेशक पर्यटन क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर मंथन करेंगे। इससे उत्तराखंड में पर्यटन, विशेषकर वेडिंग टूरिज्म, को नई दिशा और गति मिलेगी। उन्होंने आयोजन के लिए ICEI की टीम और पुनर्नवा वेलनेस रिजॉर्ट के संस्थापक आचार्य आशीष सेमवाल को बधाई देते हुए कहा कि इस सम्मेलन के सकारात्मक परिणाम राज्य के पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
त्रियुगीनारायण सहित कई स्थलों को मिलेगा नया स्वरूप
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का पवित्र मिलन है। ऐसे में देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक विरासत इसे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए विशेष बनाती है। उन्होंने बताया कि त्रियुगीनारायण मंदिर, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में माना जाता है, के साथ-साथ ऊखीमठ (ओंकारेश्वर), रामनगर, टिहरी, मसूरी और अन्य प्रमुख स्थलों को विश्वस्तरीय वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
धामी ने कहा कि डेस्टिनेशन वेडिंग से केवल होटल और रिसॉर्ट उद्योग ही नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों, लोक कलाकारों, होमस्टे संचालकों, टैक्सी चालकों और छोटे कारोबारियों को भी रोजगार और आय के नए अवसर मिलते हैं। इसलिए राज्य सरकार इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम मानकर आगे बढ़ा रही है।
वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और वेलनेस का अनूठा संगम है। राज्य सरकार वेडिंग टूरिज्म के साथ-साथ स्पिरिचुअल और वेलनेस टूरिज्म को भी समान प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के विकास, हरिद्वार-ऋषिकेश, विवेकानंद, गोल्ज्यू, यमुना और शारदा कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यटन और निवेश के लिए बेहतर कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आज बेहतर कानून-व्यवस्था, सुशासन और निवेश अनुकूल नीतियों के कारण निवेशकों का भरोसेमंद राज्य बन चुका है। उन्होंने बताया कि चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, विभिन्न रोपवे परियोजनाएं, जौलीग्रांट और पंतनगर हवाई अड्डों का विस्तार तथा सभी जिलों में हेलीपोर्ट विकास जैसे कार्य पर्यटन को नई गति देंगे।
साथ ही, सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली के माध्यम से निवेशकों, वेडिंग प्लानर्स और इवेंट आयोजकों को आवश्यक प्रशासनिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों और निवेशकों से उत्तराखंड के पर्यटन विकास के लिए सुझाव देने का आग्रह करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से राज्य को विश्व के सर्वश्रेष्ठ वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा।