अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि आलमबदी आजमी का निधन पार्टी और प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
1996 में पहली बार पहुंचे थे विधानसभा
आलमबदी आजमी का जन्म वर्ष 1936 में आजमगढ़ जिले के बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज) में हुआ था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक नौकरी की, लेकिन बाद में समाज सेवा और राजनीति को अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। इसके बाद जनता ने उन पर लगातार भरोसा जताया और वे कुल पांच बार विधायक चुने गए।
मंत्री पद ठुकराकर चुनी जनसेवा
साल 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए पद स्वीकार नहीं किया कि वे अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर सेवा करना चाहते हैं। उनके इस फैसले को राजनीतिक जीवन का सबसे उल्लेखनीय उदाहरण माना जाता है।
सादगी भरा जीवन बनी पहचान
आलमबदी आजमी अपनी सादगी के लिए भी व्यापक रूप से जाने जाते थे। साधारण पहनावा, बिना किसी राजनीतिक दिखावे के लोगों के बीच रहना और आम नागरिकों की तरह जीवन जीना उनकी पहचान थी। वे अक्सर खुद लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते थे और क्षेत्र में पैदल भ्रमण करते दिखाई देते थे।
ईमानदार छवि के लिए रहे चर्चित
प्रदेश की राजनीति में आलमबदी आजमी को साफ-सुथरी और ईमानदार छवि वाले नेताओं में गिना जाता था। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण उनकी राजनीतिक शैली की सबसे बड़ी पहचान रही। उन्होंने हमेशा राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना और उसी सिद्धांत के साथ सार्वजनिक जीवन बिताया। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। आजमगढ़ में उनके निधन को जनसेवा और सादगी की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है।