लखनऊ: डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का शुभारंभ शैक्षिक शोभायात्रा और ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ। समारोह में कुल 1,921 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 17 शोध उपाधियां (PhD) भी शामिल रहीं। इसके अलावा विभिन्न संकायों के 156 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण, रजत और अन्य पदकों से सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं राज्यसभा सांसद सी. सदानंद मास्टर ने विश्वविद्यालय को विशेष दर्जा (Special Status) दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इसलिए इसे विशेष पहचान और संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी ने गिनाईं उपलब्धियां और कमियां
कार्यक्रम में राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबडे भी मौजूद रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए हालिया निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इन कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने का आग्रह किया।
दिव्यांग शिक्षा को लेकर बोले नरेंद्र कश्यप
उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां दिव्यांगजनों के लिए दो विशेष विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। उन्होंने इसे प्रदेश सरकार की दिव्यांगजन कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। मीडिया द्वारा बिना फेलोशिप के शोध कर रहे दिव्यांग शोधार्थियों की आर्थिक सहायता से जुड़े सवाल पर मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और “जो भी संभव होगा, वह किया जाएगा।”
शिक्षा और समावेशी विकास पर रहा जोर
दीक्षांत समारोह के दौरान वक्ताओं ने समावेशी शिक्षा, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।