बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से पटना के लोक भवन स्थित मंडपम में ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शराबबंदी कानून लागू करना नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखकर एक स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण करना है।
‘शराबबंदी से बदली बिहार की तस्वीर’
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में सामाजिक माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पहले जनप्रतिनिधियों को गांवों में ऐसे लोगों का सामना करना पड़ता था, जो शराब के नशे में होने के कारण सामान्य बातचीत तक नहीं कर पाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा, “आज बिहार की स्थिति पहले से काफी बदली है। अब लोग अधिक धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं और सामाजिक वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।”
‘सार्वजनिक स्थानों पर दिखता है शराबबंदी का असर’
सम्राट चौधरी ने कहा कि यह स्वीकार करना होगा कि कुछ लोग चोरी-छिपे शराब का सेवन कर सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर शराबबंदी का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके अनुसार, राज्य के किसी भी हिस्से में जाने पर सार्वजनिक स्थानों पर पहले जैसी स्थिति अब देखने को नहीं मिलती और इसका लाभ आम जनता को मिल रहा है।
युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त समाज का निर्माण केवल कानून के जरिए नहीं, बल्कि जनजागरूकता और लोगों की सहभागिता से ही संभव है।सरकार का कहना है कि ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान का उद्देश्य केवल शराब की बिक्री रोकना नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाना और युवाओं को सकारात्मक दिशा देना है। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि शराबबंदी कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके और सामाजिक बदलाव की इस मुहिम को जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।