सावन मास के पहले सोमवार पर देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। वहीं, हरिद्वार से दिल्ली की ओर बढ़ रही कांवड़ यात्रा भी अपने चरम पर है। बम-बम भोले के जयघोष से दिल्ली-मेरठ मार्ग और अन्य प्रमुख मार्ग शिवमय हो चुके हैं। इस बीच रावण के वेश में कांवड़ यात्रा कर रहा एक शिवभक्त श्रद्धालुओं और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
रावण के स्वरूप में कर रहे हैं कांवड़ यात्रा
दस मुखों वाला मुकुट, माथे पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष की मालाएं, हाथ में त्रिशूल और प्रभावशाली व्यक्तित्व के साथ यह शिवभक्त बिल्कुल रावण के स्वरूप में नजर आ रहा है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के बुराड़ी तक पैदल यात्रा कर रहे इस कांवड़िये को देखने के लिए लोग रास्ते में रुक रहे हैं। कई श्रद्धालु और राहगीर उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवा रहे हैं।
मूलचंद त्यागी हैं इस अनोखे कांवड़िये का नाम
रावण के वेश में कांवड़ यात्रा कर रहे इस शिवभक्त की पहचान मूलचंद त्यागी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य रावण के उस पक्ष को लोगों के सामने लाना है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। मूलचंद त्यागी का कहना है कि रावण केवल लंका का राजा ही नहीं, बल्कि महान विद्वान, चारों वेदों का ज्ञाता और भगवान शिव का परम भक्त भी था। उनके अनुसार, रावण ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था और उसी अटूट भक्ति से प्रेरित होकर वह इस स्वरूप में कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
‘भक्ति का संदेश देना है उद्देश्य’
मूलचंद त्यागी ने कहा कि उनका मकसद किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनका मानना है कि यदि किसी भक्त की आस्था निष्कलंक और समर्पित हो, तो भगवान उसकी भक्ति अवश्य स्वीकार करते हैं। सावन के पहले सोमवार पर रावण के वेश में निकले इस कांवड़िये की अनोखी प्रस्तुति ने कांवड़ यात्रा के दौरान लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गई।