देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री रुद्रनाथ मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ यहां की प्राकृतिक खूबसूरती का भी उल्लेख किया। रुद्रनाथ मंदिर पंचकेदार में शामिल प्रमुख शिवधामों में से एक है और यहां भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। सीएम धामी ने कहा कि रुद्रनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र होने के साथ हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है। उन्होंने चमोली की यात्रा पर आने वाले लोगों से रुद्रनाथ धाम के दर्शन करने की अपील की।
17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे कपाट
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट इस वर्ष 18 मई को धार्मिक विधि-विधान के साथ खोले गए थे। कपाट खुलने के बाद करीब छह महीने तक यहां नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान चलते हैं। शीतकाल शुरू होने से पहले मंदिर के कपाट 17 अक्टूबर को बंद कर दिए जाएंगे। मान्यता है कि पंचकेदार मंदिरों का संबंध पांडवों से है। रुद्रनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 20 से 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। कठिन रास्ते के बावजूद धार्मिक आस्था और हिमालयी प्राकृतिक दृश्यों के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
हिमालय की चोटियों के बीच बसा है रुद्रनाथ धाम
रुद्रनाथ मंदिर हिमालय की गोद में एक खूबसूरत अल्पाइन घास के मैदान के बीच स्थित है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंटी जैसी ऊंची हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव की पूजा नीलकंठ महादेव के रूप में की जाती है। मंदिर के आसपास कई पवित्र जलस्रोत और कुंड भी मौजूद हैं। इनमें सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, तारा कुंड और मानस कुंड प्रमुख हैं। इसके अलावा वैतरणी और रुद्रगंगा जैसी जलधाराएं भी इस क्षेत्र की धार्मिक और प्राकृतिक विशेषता को बढ़ाती हैं।
जागड़ा पर्व को लेकर भी CM धामी ने दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रदेशवासियों को जागड़ा पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महासू देवता की आराधना से जुड़े इस लोकपर्व को उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। जौनसार-बावर के जनजातीय क्षेत्र में मनाया जाने वाला जागड़ा पर्व सामाजिक एकता और पारंपरिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पर्व प्रदेश की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महासू देवता से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना भी की।