नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यसभा चुनाव को लेकर रविवार को अपने दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया। पार्टी ने पश्चिम बंगाल से कोयल मल्लिक और उत्तराखंड से दिनेश आर्य को राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा है। दोनों सीटों पर चुनाव प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान खत्म होने के बाद इसी दिन वोटों की गिनती भी होगी और नतीजे घोषित किए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल की सीट क्यों हुई खाली?
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। यह सीट रुक्मिणी मल्लिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। रुक्मिणी मल्लिक को ही कोयल मल्लिक के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 16 जुलाई 2026 को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2032 तक था, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने के कारण सीट रिक्त हो गई। अब BJP ने इसी सीट के उपचुनाव के लिए कोयल मल्लिक को अपना उम्मीदवार बनाया है।
पहले भी कई सांसदों ने छोड़ी थी TMC
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की सीटों को लेकर हाल के महीनों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। कोयल मल्लिक के इस्तीफे से पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक भी उच्च सदन की सदस्यता छोड़ चुके थे। बाद में इन नेताओं ने BJP का दामन थाम लिया और दोबारा राज्यसभा के लिए चुने गए। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में हुए बड़े बदलावों के बीच सामने आया। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच समीकरण बदले हैं और इसका असर विधानसभा से लेकर संसद तक दिखाई दिया है।
विधानसभा से संसद तक बदले राजनीतिक समीकरण
विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के विपक्ष का नेता बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष और बगावत की खबरें सामने आई थीं। उन्हें 57 विधायकों का समर्थन मिलने की बात कही गई थी। इसके बाद पार्टी के भीतर शुरू हुई राजनीतिक हलचल का असर संसद तक भी देखने को मिला। TMC के कुछ नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाई और BJP के नेतृत्व वाले NDA के समर्थन में खड़े हुए। इससे राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच मुकाबला और दिलचस्प हो गया। अब राज्यसभा उपचुनाव में BJP ने कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। दूसरी ओर, उत्तराखंड से दिनेश आर्य को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद वहां भी चुनावी मुकाबले को लेकर तस्वीर साफ होती जा रही है।