नई दिल्ली। केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सत्ता परिवर्तन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों को हिरासत में लिया जा रहा है और पुलिस तंत्र का इस्तेमाल कर उन्हें जेल भेजने की कोशिश की जा रही है।
महुआ मोइत्रा का यह बयान चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच आया है। इससे पहले राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी सत्ता परिवर्तन की मांग को जनता की इच्छा बताया था। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के इन बयानों को अराजकता फैलाने की कोशिश करार दिया है।
महुआ मोइत्रा बोलीं- सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार अपने निहत्थे नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लेती है और उन्हें जेल भेजने के लिए पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करती है, उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है।महुआ ने अपने बयान में हिरासत की कार्रवाई और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
कपिल सिब्बल बोले- सत्ता परिवर्तन कांग्रेस नहीं जनता चाहती है
महुआ मोइत्रा से पहले राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस आरोप पर पलटवार किया, जिसमें विपक्ष पर बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था। सिब्बल ने एक्स पर कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग कांग्रेस नहीं, बल्कि देश की जनता कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के नारों के सहारे सत्ता में आई सरकार ने बाद में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित किया और मतदाता सूची में हेरफेर किया। सिब्बल ने कहा कि अब सरकार के जाने का समय आ गया है। हालांकि, भ्रष्टाचार और मतदाता सूची में हेरफेर से जुड़े ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाया था अराजकता फैलाने का आरोप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन करना चाहता है और अराजकता फैलाने के लिए युवाओं का इस्तेमाल कर रहा है। लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा था कि लोकतंत्र में किसी को भी अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने का अधिकार नहीं है। उनके इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर पलटवार किया।
नितिन नवीन ने विपक्ष को घेरा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयानों को लेकर विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। नितिन नवीन ने एक्स पर लिखा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधारों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या युवाओं के भविष्य के लिए नहीं है। उनके मुताबिक, विपक्ष अराजकता के जरिए किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहता है।भाजपा अध्यक्ष ने सत्ता परिवर्तन की मांग को विपक्ष के कथित एजेंडे से जोड़ते हुए इसे विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को अस्थिर करने की कोशिश बताया। उन्होंने विपक्ष के कुछ नेताओं के बयानों को ‘अर्बन नक्सल’ एजेंडे से भी जोड़ा।
नितिन नवीन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनादेश से होकर गुजरता है, अराजकता से नहीं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देंगे। सत्ता परिवर्तन की मांग और उस पर भाजपा की प्रतिक्रिया से साफ है कि चुनावी अनियमितताओं, SIR और विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ रहा है।