दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी GRAP-1 के तहत पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। राजधानी में बुधवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 233 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए होटल और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। वहीं, डीजल जनरेटर चलाने की अनुमति केवल आपातकालीन परिस्थितियों में दी गई है।
दिल्ली की हवा खराब, AQI 233 दर्ज
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह 9 बजे दिल्ली का AQI 233 रहा। इसके साथ ही राजधानी की हवा खराब श्रेणी में बनी हुई है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए संबंधित एजेंसियां नियंत्रण के उपायों पर काम कर रही हैं। GRAP-1 के तहत प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए जाते हैं। इसमें होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हैं। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी निर्धारित नियमों के तहत पाबंदियां लागू होती हैं।
दिल्ली में सुबह-सुबह गिरी ठंड, 18 डिग्री रहा न्यूनतम तापमान
प्रदूषण के बीच राजधानी के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बुधवार को सफदरजंग मौसम केंद्र पर न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा। यह इस मौसम के औसत से कम दर्ज किया गया। अन्य मौसम केंद्रों की बात करें तो पालम में न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 1.1 डिग्री कम है। लोधी रोड में तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक है। वहीं, रिज मौसम केंद्र पर न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.4 डिग्री कम है। आयानगर में न्यूनतम तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री कम है।
AQI की किस श्रेणी में कितनी खराब होती है हवा?
वायु गुणवत्ता सूचकांक के जरिए हवा में प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाता है। CPCB के मानकों के मुताबिक, AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है।
- 0 से 50: अच्छा
- 51 से 100: संतोषजनक
- 101 से 200: मध्यम
- 201 से 300: खराब
- 301 से 400: बहुत खराब
- 401 से 500: गंभीर
दिल्ली में AQI का 233 तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि राजधानी की हवा खराब श्रेणी में है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लागू प्रतिबंधों का पालन और वायु गुणवत्ता की निगरानी अहम होगी।