अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या शनिवार शाम दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। दीपावली से एक दिन पहले आयोजित 10वें दीपोत्सव में सरयू नदी के तट पर स्थित 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीप प्रज्वलित किए गए। लाखों दीपों की रोशनी से पूरी रामनगरी का नजारा अद्भुत हो गया। इस आयोजन ने दीपोत्सव के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया।
दीपोत्सव 2026 का शुभारंभ उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। राम की पैड़ी पर उपराष्ट्रपति ने पहला दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव की शुरुआत की। इसके बाद देखते ही देखते सरयू के घाट हजारों-लाखों दीपों की रोशनी से जगमगा उठे।
35 हजार स्वयंसेवकों ने सजाए दीप
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में करीब 35 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय और विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने कई दिनों की मेहनत से घाटों पर दीप सजाए। दीपों को निर्धारित क्रम में सजाकर ऐसी आकृतियां तैयार की गईं, जिन्होंने सरयू तट की सुंदरता को और बढ़ा दिया।
2100 ड्रोन से आसमान में साकार हुई रामायण
इस बार दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक का भी शानदार इस्तेमाल देखने को मिला। करीब 2100 स्वदेशी ड्रोन ने आसमान में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों और रामायण की झलकियां पेश कीं। ड्रोन शो में राम दरबार और प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी जैसे दृश्य दिखाए गए। इसके अलावा 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और संगीत के साथ आतिशबाजी ने समारोह को और आकर्षक बना दिया।
2147 अर्चकों ने की सरयू महाआरती
दीपोत्सव के दौरान सरयू तट पर भव्य महाआरती का आयोजन भी किया गया। इसमें 2147 अर्चकों ने एक साथ भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने इस अलौकिक दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया।
2017 में शुरू हुआ था दीपोत्सव का सफर
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। पहले आयोजन में करीब 1.71 लाख दीप जलाए गए थे। इसके बाद हर साल इस आयोजन का दायरा और भव्यता बढ़ती गई। वर्ष 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाए गए थे। अब 10वें संस्करण में 30 लाख से अधिक दीपों के प्रज्वलन के साथ दीपोत्सव ने एक नया मुकाम हासिल किया है।
रामायण के प्रसंगों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, आकर्षक रोशनी और दीपों की जगमगाहट ने अयोध्या को उत्सव के रंग में रंग दिया। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की पहचान को भी एक नई ऊंचाई देता नजर आया।