नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की 10 साल की सजा को स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस रविंदर डुडेजा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सेंगर ने कुल सजा का करीब 7.5 साल जेल में काटा है और अपील में देरी का एक कारण उनके द्वारा दाखिल की गई कई याचिकाएं भी रही हैं। इसलिए कोर्ट ने उनकी बेल और सजा को सस्पेंड करने की मांग को अस्वीकार कर दिया।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के कुछ हफ्तों बाद आया है, जिसमें सेंगर को 2017 के रेप केस में उम्रकैद की सजा मिलने पर उसे अस्थायी राहत दी गई थी। इस मामले का सिलसिला 9 अप्रैल 2018 से शुरू हुआ, जब उन्नाव रेप पीड़िता के पिता को सेंगर के निर्देश पर गिरफ्तार किया गया था और पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई थी। मार्च 2020 में दिल्ली की एक कोर्ट ने सेंगर और अन्य आरोपी को इस मौत के लिए दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
जस्टिस डुडेजा ने फैसले में कहा कि सजा के बाद इस मामले में ऐसा कोई नया तथ्य सामने नहीं आया है, जो सेंगर के पक्ष में सजा स्थगित करने का आधार बन सके। उन्होंने यह भी बताया कि सेंगर का आपराधिक रिकॉर्ड और अपराध की गंभीरता देखते हुए इस समय सजा सस्पेंड करना उचित नहीं है। कोर्ट ने अपील को मेरिट के आधार पर जल्दी सुनवाई के निर्देश के साथ आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। जस्टिस ने स्पष्ट किया कि सजा को अस्थायी रूप से रोकने के बजाय, अपील पर अंतिम फैसला सुनाना ही सही तरीका है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी तरह की सेंगर की याचिका जून 2024 में भी खारिज कर दी थी। उस समय भी कोर्ट ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, दोषी का रिकॉर्ड और न्याय व्यवस्था में विश्वास पर असर जैसे सभी पहलुओं को देखते हुए सजा स्थगित नहीं की जा सकती। कुलदीप सिंह सेंगर 13 अप्रैल 2018 से जेल में हैं और अभी भी कस्टोडियल डेथ केस में मिली 10 साल की सजा पूरी कर रहे हैं।