लंबे समय से हीरों को पृथ्वी के गर्भ से निकाला जा रहा है। निरंतर वैज्ञानिकों के उन्नति के जरिए अब ये काम लैब में भी किया जा सकेगा। रासायनिक रूप से हीरे शुद्ध कार्बन के बने होते है। अगर इसे काफी ज्यादा तापमान पर गर्म किया जाए तो ये कार्बन डाइऑक्साइड बन जाएगा। हीरा काफी दुर्लभ पदार्थ होता है। इसीलिए इनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है।
हीरों को खनन द्वारा निकालने में काफी मेहनत लगती है। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में पानी की बर्बादी होती है। इसके अलावा जहां पर हीरों का खनन किया जाता है वहां पर हजारों-हजार पेड़ों को काट दिया जाता है। खनन के दौरान मजदूरों को बेहद ही खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में प्रयोगशाला में बने हीरे आने वाले दौर में गेम चेंजिंग चीज साबित हो सकती है।
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि हीरों को इंसान और जानवर दोनों के शरीर से बनाया जा सकता है। हमारे शरीर की संरचना में कार्बन के एटम का बहुत बड़ा योगदान है। अगर कार्बन नहीं होता, तो पृथ्वी पर जीवन भी संभव नहीं हो पाता। इसी वजह से कार्बन को जीवन का मूलाधार माना जाता है। अगर किसी मृत जानवर या इंसान के शरीर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को निकाल दिया जाए तो शरीर के टिशू के अंदर शुद्ध रूप में कार्बन बचेगा।