नई दिल्ली। पाकिस्तान और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के रिश्तों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संगठन के डिप्टी चीफ और पहलगाम हमले के कथित साजिशकर्ता सैफुल्लाह कसूरी ने सार्वजनिक मंच से पाकिस्तान की सेना के साथ अपने संबंधों को स्वीकार किया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कसूरी यह कहते हुए दिखाई देता है कि पाकिस्तानी सेना उसे नियमित रूप से अपने कार्यक्रमों में बुलाती है और यहां तक कि शहीद सैनिकों की अंतिम संस्कार की नमाज़ अदा करने के लिए भी आमंत्रण भेजती है।
यह बयान उसने पाकिस्तान के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए दिया। वीडियो में वह दावा करता है कि उसे सेना की ओर से औपचारिक न्योते मिलते हैं। उसके इस कबूलनामे ने पाकिस्तान के उन बयानों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिनमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करता रहा है।
भारत को लेकर भड़काऊ बयान
कसूरी ने अपने भाषण में भारत के खिलाफ भी तीखे और उकसावे वाले बयान दिए। उसने कहा कि भारत उससे भयभीत है। इससे पहले वह भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी विवादित टिप्पणियाँ कर चुका है। उसने माना कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचों को नुकसान पहुंचा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत ने यह कार्रवाई कर गलती की है। उसने दोहराया कि कश्मीर को लेकर लश्कर-ए-तैयबा अपने उद्देश्य से पीछे हटने वाला नहीं है।
पहलगाम हमले को लेकर दिखाया घमंड
एक अन्य सार्वजनिक सभा में कसूरी ने पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताए जाने पर गर्व जताया था। उसने कहा था कि इस आरोप के बाद उसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन गई है। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी।
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच लगभग चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमलों का दौर चला। अंततः 10 मई को भारत और पाकिस्तान संघर्ष रोकने पर सहमत हुए।