नई दिल्ली। ईरान में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिका की राजनीति में बड़ा फैसला सामने आया है। अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति Donald Trump के खिलाफ लाए गए उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसका उद्देश्य ईरान में चल रहे सैन्य अभियान को सीमित करना था। इस फैसले के बाद संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई फिलहाल जारी रह सकती है।
47 के मुकाबले 53 वोट से प्रस्ताव गिरा
सीनेट में लाया गया यह युद्ध शक्ति प्रस्ताव 47 के मुकाबले 53 वोटों से गिर गया। प्रस्ताव का मकसद राष्ट्रपति को ईरान में सैन्य अभियान चलाने से पहले कांग्रेस की अनुमति लेने के लिए बाध्य करना था। लेकिन रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन करते हुए इसे खारिज कर दिया।
किसने पेश किया था प्रस्ताव
ईरान में युद्ध को सीमित करने का यह प्रस्ताव डेमोक्रेट सीनेटर Tim Kaine और रिपब्लिकन सीनेटर Rand Paul ने मिलकर पेश किया था। इसमें कहा गया था कि जब तक कांग्रेस औपचारिक मंजूरी न दे, तब तक अमेरिकी सैनिकों को ईरान में सैन्य कार्रवाई से वापस बुलाया जाए।
हालांकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत होने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके साथ ही ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिल गया, जिसे ट्रंप प्रशासन की बड़ी जीत माना जा रहा है।
डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने ईरान पर हमलों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस को भरोसे में लिए बिना सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। उनका कहना है कि प्रशासन ने युद्ध के औचित्य को लेकर स्पष्ट सबूत भी पेश नहीं किए।
सीनेटर टिम केन ने कहा कि गोपनीय ब्रीफिंग के दौरान ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे यह लगे कि अमेरिका को ईरान से तत्काल खतरा था।
ट्रंप बोले- जंग में मजबूत स्थिति
इस बीच राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका और उसके सहयोगी मजबूत स्थिति में हैं और अभियान जारी रहेगा।
व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं युद्ध के मैदान में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस अभियान को 10 में से नंबर देने हों तो वह इसे “करीब 15” अंक देंगे। फिलहाल मध्य-पूर्व में जारी इस संघर्ष पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इसे लेकर कूटनीतिक और सैन्य हलचल तेज है।