तेहरान। ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सुल्तानी को 8 जनवरी को प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में 11 जनवरी को उनके खिलाफ कोर्ट ने “मोहारेबेह” (अल्लाह के खिलाफ युद्ध) का आरोप लगाते हुए फांसी की सजा सुनाई।
कानूनी मदद से वंचित
सूचनाओं के मुताबिक, सुल्तानी को न्यायिक प्रक्रिया में उचित कानूनी मदद नहीं मिली। उनके परिवार ने बताया कि फांसी से पहले उन्हें केवल 10 मिनट की आखिरी मुलाकात की अनुमति दी जाएगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा। इस पर ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने पलटवार करते हुए ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को “ईरान में हत्यारा” करार दिया।
ईरान में फांसी का रिकॉर्ड
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा सबसे अधिक फांसी देने वाला देश है। नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ग्रुप का कहना है कि पिछले साल कम से कम 1,500 लोगों को ईरान में फांसी दी गई।
इसी बीच, व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ ने गुप्त रूप से ईरान के निर्वासित पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी से मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा करना था। पहलवी, जो बचपन में ईरान के अगले शाह बनने के लिए तैयार किए गए थे, अब विरोध आंदोलनों में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में सामने आए हैं।
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी, 147 सरकारी कर्मी, 12 बच्चे और 9 सामान्य नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, 18 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए हैं।