काशी विश्वनाथ धाम ने लम्बे वक़्त तक अपनी मां अनपूर्णा का इंतज़ार किया है। अब ये इंतज़ार खत्म हो गया है। 108 वर्ष पहले गायब मां अन्नपूर्णा की मूर्ति काशी विश्वनाथ धाम पहुंची। बाबा विश्वनाथ की नगरी कशी की पहचान से मां अनपूर्णा का नाम भी जुड़ा हुआ है। अन्नपूर्णा माता की 18वीं सदी की एक दुर्लभ मूर्ति की आज यानी 15 नवंबर को प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इस अवसर पर कशी विश्वनाथ मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है।
बता दें कि विश्वनाथ मंदिर परिसर में प्रतिमा पहुंचने पर उसे गाड़ी से उतारकर पालकी पर रखा गया। सीएम योगी ने खुद पालकी उठाई और प्रतिमा को स्थापना स्थल तक पहुंचाया। मूर्ति को विश्वनाथ मंदिर के ईशान कोण में स्थापित किया गया। सीएम योगी के हाथों प्राण प्रतिष्ठा किया गया। कनाडा से काशी पहुंची माता अन्नपूर्णा की प्राचीन मूर्ति को बाबा विश्वनाथ के विशेष रजत सिंहासन पर विश्वनाथ धाम में प्रवेश कराया गया। अपनी मां के दर्शन मात्र पाने के लिए श्रद्धालू पलकें बिछाए बैठे रहे। काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए रविवार को भक्तों की भारी भीड़ नज़र आई। एसी भीड़ विशेष अवसरों व त्योहारों के समय दिखती है।
मां अनपूर्णा की मूर्ति का इतिहास
करीब सौ साल पहले चोरी होकर माता अन्नपूर्णा की 18 वीं सदी की ये दुर्लभ मूर्ति काशी से कनाडा पहुंच गई थी। बनारस शैली में उकेरी गई 18वीं सदी की यह मूर्ति कनाडा की यूनिवर्सिटी आफ रेजिना में मैकेंजी आर्ट गैलरी की शोभा बढ़ा रही थी। इस आर्ट गैलरी को 1936 में वकील नार्मन मैकेंजी की वसीयत के अनुसार तैयार किया गया था। वर्ष 2019 में विनिपेग में रहने वाली भारतीय मूल की मूर्तिकार कला विशेषज्ञ दिव्या मेहरा को प्रदर्शनी लगाने के लिए आमंत्रित किया गया था। यहां उन्होंने मूर्ति पर गहन अध्ययन किया।
इसी दौरान उन्हें इस मूर्ति के भारत के होने का पता चला। दिव्या मेहरा ने पता लगाया कि गुलाम भारत में वाराणसी में गंगा किनारे क्षेत्र से 1913 के आसपास मां अन्नपूर्णा की मूर्ति चोरी हुई थी। चोरी होने के बाद मूर्ति तस्करों द्वारा गुपचुप तरीके से यह मूर्ति कनाडा पहुंच गई और फिर मैकेंजी आर्ट गैलरी की शोभा बढ़ाने लगी। मूर्ति पर अध्ययन करने के बाद दिव्या मेहरा ने भारतीय दूतावास को इसके बारे में सूचित किया।
पीएम मोदी की पहल पर वापस आई मूर्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर कनाडा सरकार ने ये मूर्ति भारत को लौटा दी। माता अन्नपूर्णा की इस मूर्ति को पिछले दिनों कनाडा से वापस दिल्ली लाया गया और फिर इसे यूपी सरकार को सौंपा गया। दिल्ली से रथ के जरिए माता अन्नपूर्णा की ये प्रतिमा वाराणसी के लिए दो दिन पहले रवाना कर दी गई थी। बता दें कि 13 दिसंबर को पीएम मोदी द्वारा लोकार्पण के बाद दुनिया भर के लोग काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में देवी अन्नपूर्णा का भी दर्शन और पूजन कर सकेंगे।
