बांग्लादेश को आखिरकार नई सरकार मिल गई है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी के नेता तारिक रहमान ने आज प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली। साल 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और उसके बाद हुई हिंसा के चलते देश लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने “मुख्य सलाहकार” के रूप में अंतरिम नेतृत्व संभाला था। हालांकि सोमवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देते हुए सत्ता की जिम्मेदारी नवनिर्वाचित सरकार को सौंप दी। पद छोड़ते समय यूनुस ने कहा कि लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
हाल ही में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। 297 सीटों में से 209 सीटें जीतकर पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी। तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के बेटे हैं। 36 वर्षों बाद वह देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बने हैं।
उनका राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने 17 वर्षों का निर्वासन झेला, जेल और कानूनी मामलों का सामना किया। इसी दौरान उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हुईं, जिनमें रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दिक्कत शामिल है। वह 1990 से सक्रिय राजनीति में हैं और 1991 में अपनी मां खालिदा जिया को प्रधानमंत्री बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।शेख हसीना के शासनकाल में एक मामले में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई थी, हालांकि उस समय वह निर्वासन में थे। 2024 में छात्र आंदोलन के बाद उनकी स्वदेश वापसी का रास्ता साफ हुआ। अंतरिम सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे रद्द कर दिए गए, जिससे उन्हें राहत मिली।
दिसंबर 2025 में उन्होंने लंदन से बांग्लादेश लौटने की घोषणा की। ढाका पहुंचने के समय उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो चुका था। इसके बाद उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों स्थानों से जीत हासिल की। नई सरकार के गठन के साथ ही बांग्लादेश में स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।