NASA के दो अंतरिक्ष यात्री, सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर नौ महीने बाद स्पेस से धरती पर वापस आ गए हैं। इनकी वापसी स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए हुई। दोनों एस्ट्रोनॉट्स ISS पर एक टेस्ट मिशन के लिए गए थे, लेकिन बोइंग के स्टारलाइनर यान में आई खराबी की वजह से उनका मिशन निर्धारित 8 दिन के बजाए 9 महीने लंबा हो गया। अपने लंबे मिशन के दौरान वे विभिन्न कार्यों में एक्टिव रहें और दोनों ने अपने मिशन को सफलता के साथ पूरा किया।
अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटते समय सुनीता और बुच ने मंगलवार 5:57 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार, 3:27 बजे) फ्लोरिडा के तट पर सागर में स्प्लैशडाउन किया। इसके बाद अंतरिक्षयात्री अपने यान से बाहर निकाले गए और उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाया गया, जहां उनके शारीरिक परीक्षण किए गए। यह प्रक्रिया अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सामान्य है, क्योंकि वे माइक्रोग्रैविटी में लंबे समय तक रहने के बाद धरती पर वापसी करते हैं, जिससे शरीर में कई बदलाव आते हैं।
स्पेस में रहकर होने वाले शारीरिक बदलाव
अंतरिक्ष में रहने के दौरान, अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में कई शारीरिक बदलाव होते हैं। माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव से उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और उनका संतुलन प्रभावित होता है। पृथ्वी पर लौटने पर उन्हें चक्कर आ सकते हैं, चलने में कठिनाई हो सकती है और शरीर के कुछ हिस्सों जैसे पैरों की त्वचा में भी बदलाव आ सकते हैं, जिसे “बेबी फीट” कहा जाता है।
सुनीता और बुच, जिनका मिशन लगभग 9 महीने लंबा था, उन्हें “बेबी फीट” जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें पैरों की त्वचा नरम हो जाती है। इसके अलावा, वे दौड़ने, चलने और आंखों की स्थिरता बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
इन समस्याओं से निपटने के लिए, आमतौर पर वापस आने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को तुरंत एक कुर्सी पर बैठाया जाता है, ताकि वे अपने शरीर को सामान्य स्थिति में लाने के लिए समय ले सकें।