नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की 1 मार्च 2026 को संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली हवाई हमलों में मौत हो गई।
सरकार ने उनके निधन के बाद 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। सरकारी एजेंसियों ने खामेनेई को “शहीद” बताते हुए कहा कि वे तेहरान स्थित अपने आवास और कार्यालय परिसर पर हुए हमले में मारे गए।
28 फरवरी को हुआ था बड़ा हमला
बताया जा रहा है कि शनिवार, 28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इस संयुक्त अभियान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सैन्य क्षमताओं और नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई बताया था।
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पहले ही बयान जारी कर खामेनेई की मौत का दावा किया था। हालांकि शुरुआती दौर में ईरान ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन बाद में सरकारी मीडिया ने आधिकारिक पुष्टि कर दी।
इज़रायली अधिकारियों के मुताबिक, हमले के बाद मलबे से खामेनेई का शव बरामद किया गया।
ट्रंप का बयान, तेज होंगे हमले
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “खामेनेई हमारे इंटेलिजेंस और एडवांस ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाए।” उन्होंने संकेत दिया कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र में शांति के लक्ष्य को हासिल नहीं कर लिया जाता।ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के कुछ सैन्य और सुरक्षा बल संघर्ष से पीछे हटना चाहते हैं और स्थिति तेजी से बदल रही है।
क्षेत्र में बढ़ा तनाव
खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद तेहरान समेत कई इलाकों में तनाव बना हुआ है। हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम मध्य-पूर्व में व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है। वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग और कूटनीतिक समीकरणों पर इसके दूरगामी असर की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस तेजी से बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।