मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आखिरी अल्टीमेटम दे दिया है। वाशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ सार्थक और मजबूत समझौता करना होगा, नहीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान को 10 से 15 दिनों का समय दिया गया है। उन्होंने कहा, “इस दौरान या तो हम बहुत अच्छी डील करेंगे, या उनके लिए बुरा समय शुरू हो जाएगा।” उन्होंने दोहराया कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य मौजूदगी
ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट के पास पहुंच गया है। इसे मिसाइल से लैस डिस्ट्रॉयर और लिटोरल कॉम्बैट शिप के साथ तैनात किया गया है, जो कम गहरे पानी में भी ऑपरेशन कर सकते हैं।अमेरिका और ईरान दोनों ने संकेत दिए हैं कि अगर न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत नाकाम होती है तो युद्ध की संभावना है।
पिछले साल ईरान की न्यूक्लियर साइट्स और मिलिट्री पर 12 दिनों तक इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सेना ने हमले किए थे। इन हमलों में ईरान की साइट्स को बड़ा नुकसान हुआ। इसके बाद जनवरी में ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जिन्हें हिंसक तरीके से दबाया गया। इन घटनाओं के बाद सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का शासन कमजोर हुआ है।ट्रंप की ताजा चेतावनी ने युद्ध के संकेतों को और मजबूत कर दिया है।