वॉशिंगटन/मॉस्को। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई है। रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों नेताओं ने ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
रूस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन किया था। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ईरान और यूक्रेन में जारी संघर्ष को लेकर विस्तार से बातचीत हुई।
करीब एक घंटे चली बातचीत
रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, यूरी उशाकोव ने पत्रकारों को बताया कि दोनों नेताओं के बीच फोन पर करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि यह वार्ता व्यावहारिक, खुली और रचनात्मक रही, जैसा कि आम तौर पर रूसी और अमेरिकी राष्ट्रपतियों के बीच संवाद में होता है।
बातचीत के दौरान ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं पुतिन ने इस दिशा में अमेरिकी प्रशासन की ओर से किए जा रहे मध्यस्थता प्रयासों के लिए ट्रंप का आभार भी व्यक्त किया।
ईरान संकट पर भी हुई चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने ईरान में चल रहे संघर्ष पर भी अपने विचार साझा किए और ट्रंप को हाल ही में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी। उशाकोव ने बताया कि इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच गंभीर और सार्थक चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच पिछली बार दिसंबर में फोन पर बातचीत हुई थी, जिसे व्हाइट हाउस ने सकारात्मक बताया था।
ईरान को रूस का समर्थन
इससे पहले सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को उनके पद संभालने पर बधाई दी। साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान को रूस के समर्थन का भरोसा भी दिलाया। रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने कहा कि ऐसे समय में जब ईरान बाहरी हमलों का सामना कर रहा है, उन्हें विश्वास है कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए देश को एकजुट रखेंगे।
तेल और गैस सप्लाई पर संकट की चेतावनी
पुतिन ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात बिगड़े तो वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इससे खाड़ी देशों में तेल उत्पादन रुक सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में नई उछाल आ सकती है।