मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अब जंग का दायरा हिंद महासागर तक पहुंच गया है। अमेरिका ने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरान के नौसैनिक युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो हमले में डुबो दिया। इस हमले में जहाज पर सवार 180 लोगों में से कम से कम 87 ईरानी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में मौजूद ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। टॉरपीडो हमले के बाद जहाज कुछ ही मिनटों में गहरे समंदर में समा गया। अमेरिका ने इस कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया है।
हेगसेथ ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने हिंद महासागर में किसी दुश्मन के युद्धपोत को निशाना बनाया है। उन्होंने इसे “क्वाइट डेथ” यानी शांत मौत करार देते हुए कहा कि यह हमला दिखाता है कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी कार्रवाई करने में सक्षम है।
जानकारी के मुताबिक 4 मार्च को जहाज से संकट का संदेश यानी डिस्ट्रेस कॉल भेजा गया था। इसके बाद श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अनुसार युद्धपोत पर कुल 180 लोग सवार थे।
बचाव अभियान के दौरान 32 लोगों को जिंदा निकाला गया, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें इलाज के लिए श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं कई लोगों के अब भी लापता होने की आशंका है।
इस हमले के बाद अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है और पूरे क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।