नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाने वाला एक दूरदर्शी और साहसिक दस्तावेज़ है। यह बजट केवल आँकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ की संकल्पना का स्पष्ट मार्गदर्शक है। एक ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से जूझ रही है, टैरिफ़ युद्ध की आहट है, और भू-राजनीतिक संकट गहरा रहे हैं इस बजट ने दिखाया है कि भारत न केवल इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम है, बल्कि उनमें अवसर तलाशने की दृष्टि भी रखता है।
आम तौर पर सरकारों पर लोकलुभावन बजट प्रस्तुत करने का दबाव रहता है, लेकिन इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने लोकप्रियता के बजाय दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए एक सुदृढ़, स्थिर और आत्मविश्वास से भरी अर्थव्यवस्था की नींव रखी गई है। राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए पूँजीगत व्यय को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना यह सरकार की प्रतिबद्धता और आर्थिक समझ दोनों का प्रमाण है।
युवा भारत की ऊर्जा और आकांक्षाओं को इस बजट ने गहराई से समझा है। रोज़गार सृजन के नए अवसर, कौशल विकास कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण की ठोस योजनाएँ, और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार ये सब मिलकर आम नागरिक के जीवनस्तर को ऊपर उठाने का एक व्यापक खाका प्रस्तुत करते हैं। MSME क्षेत्र के लिए घोषित ग्रोथ फंड और ऋण गारंटी सीमा में वृद्धि से देश के 5.93 करोड़ से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नई संजीवनी मिलेगी – विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहाँ उद्यमिता की असली ज़मीन है।
टैरिफ़ युद्ध की वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में उद्योग और व्यापार जगत को निर्बाध गति देना इस बजट की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्पादन क्षेत्र को मज़बूती देने, निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने, और ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक बाज़ार में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए जो नीतिगत ढाँचा प्रस्तुत किया गया है, वह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, बायोफ़ार्मा शक्ति जैसी पहलें इसी दृष्टि की अभिव्यक्ति हैं।
अवसंरचना विकास इस बजट का केंद्रीय स्तंभ है। सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई-पुणे से लेकर दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी तक न केवल यात्रा के समय को क्रांतिकारी रूप से कम करेंगे, बल्कि इन मार्गों पर आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और रोज़गार का एक नया गलियारा खोलेंगे। इसके साथ ही अगले पाँच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग संचालित किए जाने की घोषणा जल परिवहन के एक किफ़ायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प को जनता तक पहुँचाएगी। जल मार्गों और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी को 2047 तक 6% से बढ़ाकर 12% करने का लक्ष्य एक दूरगामी सोच का प्रमाण है।
उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में यह बजट विशेष रूप से उत्साहवर्धक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इस बजट को उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति देने वाला बताया है, और इसके पर्याप्त कारण हैं।
सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) योजना टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए एक गेमचेंजर सिद्ध होगी। प्रत्येक CER को पाँच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन, चुनौती-आधारित और सुधार-सह-परिणाम वित्तपोषण मॉडल के तहत दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और झाँसी जैसे शहरों के लिए यह योजना महानगरों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने का अभूतपूर्व अवसर है। इन शहरों में जो औद्योगिक क्षमता, शैक्षणिक अवसंरचना और सांस्कृतिक विरासत विद्यमान है, CER उसे उत्प्रेरित करने का माध्यम बनेगा।
सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी सीधे उत्तर प्रदेश से होकर गुज़रेंगे। 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने वाली ट्रेनें न केवल दिल्ली से वाराणसी और पूर्वोत्तर भारत की यात्रा को तीव्रगामी, सुगम और सुरक्षित बनाएँगी, बल्कि इन मार्गों पर औद्योगिक, पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेंगी। यह उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय रेल संपर्क से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है।
राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) के तहत वाराणसी और पटना में इनलैंड वॉटरवेज़ शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किए जाने का प्रस्ताव बजट में किया गया है। भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी में यह परियोजना बहुआयामी प्रभाव डालेगी आध्यात्मिक पर्यटन को जल मार्ग से जोड़ने का एक अनूठा मॉडल विकसित होगा, गंगा तट पर बसी बस्तियों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, और पर्यावरण जागरूकता का एक नया अध्याय लिखा जाएगा। वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग पहले से संचालित है और इसे प्रयागराज तथा यमुना नदी तक विस्तारित करने के प्रस्ताव भी तैयार हैं यह उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य को मूलतः बदल सकता है।
सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश को विशेष महत्व दिया गया है। देश भर में 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित करने की योजना में उत्तर प्रदेश के सारनाथ (वाराणसी) और हस्तिनापुर (मेरठ) दोनों सम्मिलित हैं। इन स्थलों पर क्यूरेटेड वॉकवे, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग तकनीक और व्याख्या केंद्र स्थापित किए जाएँगे। बौद्ध धर्म के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ और महाभारतकालीन हस्तिनापुर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने की यह पहल उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध करेगी।
बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा कुल 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूँजीगत व्यय प्रस्तावित है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उत्तर प्रदेश, जहाँ से पूर्वी और पश्चिमी दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर गुज़रते हैं, इस आवंटन का प्रमुख लाभार्थी होगा। इससे राज्य में देश के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स हब का विकास होगा, जो उद्योग, व्यापार और रोज़गार सृजन को सीधे प्रभावित करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रत्येक जिला अस्पताल में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर स्थापित किए जाने तथा ट्रॉमा केयर क्षमता में 50 प्रतिशत की वृद्धि का बजटीय प्रावधान ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवन बचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से तृतीयक अस्पतालों की दूरी अक्सर जानलेवा सिद्ध होती है, जिला स्तर पर ट्रॉमा केयर की सुविधा लाखों परिवारों के लिए संजीवनी साबित होगी।
कृषि प्रधान उत्तर प्रदेश के लिए किसानों की आय बढ़ाने, उच्च मूल्य वाली फ़सलों को प्रोत्साहन, और 500 जलाशयों तथा अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की योजना सिंचाई, जल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करेगी। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) पहल, जिसे उत्तर प्रदेश ने सफलतापूर्वक प्रवर्तित किया है, को MSME ग्रोथ फंड से नई ऊर्जा मिलेगी।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 जन सामान्य की सुविधाएँ बढ़ाने, रोज़गार सृजन को गति देने, खेती-किसानी को समृद्ध करने, और भारत को एक आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर करने वाला बजट है। यह बजट न केवल वर्तमान की चुनौतियों का समाधान करता है, बल्कि 2047 के भारत की नींव रखता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो विकास यात्रा 2014 में आरंभ हुई थी, यह बजट उसे एक नई ऊँचाई पर ले जाने का संकल्पपत्र है।