नई दिल्ली। 2014 में नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व में केंद्र की सत्ता पर आसीन हुई भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। आज देश के आधे से अधिक राज्यों में भाजपा की सरकार है। यही नहीं प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के चलते बीजेपी विभिन्न पार्टियों के नेताओं की पहली पसंद बनती जा रही है। वर्ष 2014 से अब तक 211 विधायक और सांसदों ने पार्टी जॉइन की, जिसमे सबसे ज्यादा कांग्रेस के है।
जदयू प्रमुख नीतीश कुमार द्वारा बिहार में भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ने के बाद बीते शुक्रवार को मणिपुर के जनता दल (यूनाइटेड) के छह विधायकों में से पांच सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए। मणिपुर के इस सियासी घटनाक्रम को नीतीश कुमार द्वारा पिछले महीने भाजपा से गठबंधन तोड़ने के परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2014 में केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से 2022 तक 211 विधायक और सांसद भाजपा में शामिल हुए हैं। इस दौरान 60 विधायक और सांसदों ने भाजपा छोड़ी। विपक्षी दल भाजपा पर लगातार अपने संसाधनों, प्रलोभनों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल के भी आरोप लगाते रहे हैं।
कांग्रेस को बड़ा नुकसान
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक इस दलबदल में कांग्रेस को सबसे ज्यादा झटका लगा है। सबसे ज्यादा विधायकों और सांसदों ने कांग्रेस छोड़ी है। 2014 से 2021 तक यह संख्या 177 है और इस साल गोवा, मणिपुर, उप्र, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव से पहले 20 और इसमें जुड़ गए हैं। इनमें से 84 ने भाजपा का हाथ थामा है, जिनमें 2021 तक 76 और इस साल विधानसभा चुनावों के करीब 8 नेता कांग्रेस छोड़ भाजपा भाजपा में शामिल हुए।