नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है। पिछले कुछ दिनों से यात्रियों को फ्लाइट में घंटों देरी और लगातार कैंसिलेशन का सामना करना पड़ रहा है। सिर्फ इसी महीने इंडिगो की 4,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। बढ़ती अव्यवस्था पर अब केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
नियमों की अनदेखी पर ‘मिसाल बनने वाली कार्रवाई’ – नागरिक उड्डयन मंत्री
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो द्वारा बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में कहा कि यह संकट “इंडिगो ने खुद पैदा किया है” और मंत्रालय लगातार एयरलाइन के संपर्क में था।
मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने इंडिगो से कई बार बैठक की। कंपनी से स्पष्टीकरण माँगा गया, एयरलाइन अपने क्रू रोस्टर को बनाए रखने में विफल रही। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी एयरलाइन पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक उदाहरण बने।
नायडू ने संसद में यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया और कहा कि सरकार मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर देख रही है। उन्होंने यात्रियों के वित्तीय और भावनात्मक नुकसान को भी स्वीकारा।
इंडिगो की 5% उड़ानें दूसरी एयरलाइंस को मिलने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थिति सुधारने के लिए सरकार इंडिगो के कुल फ्लाइट शेड्यूल में 5% कटौती कर सकती है। जरूरत पड़ने पर 5% और कटौती भी संभव है। यानी कुछ उड़ानें अस्थायी रूप से अन्य एयरलाइंस को सौंप दी जाएंगी ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई
इंडिगो के व्यापक कैंसिलेशन को लेकर दायर याचिका पर 10 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में माँग की गई है कि प्रभावित यात्रियों को समुचित सहायता दी जाए, टिकट कैंसिलेशन पर पूरा रिफंड दिया जाए