लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए धर्मांतरण मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। आरोपी डॉ. रमीज मलिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ जारी है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि उसके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन KGMU प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सूत्रों के अनुसार, पीड़िता ने 17 दिसंबर को ही आरोपी डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन विभागाध्यक्ष ने करीब पांच दिनों तक मामले को दबाए रखा। आरोप है कि इससे पहले भी डॉ. रमीज के खिलाफ शिकायतें सामने आई थीं, बावजूद इसके KGMU के जिम्मेदार अधिकारियों ने उस पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की। FIR दर्ज होने तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुप्पी बनी रही।
बताया जा रहा है कि डॉ. रमीज मलिक दो हफ्ते से अधिक समय तक फरार रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच टीमें लगातार दबिश दे रही थीं। आरोप है कि डॉ. रमीज ने एक महिला चिकित्सक का धर्म परिवर्तन कराकर उससे फर्जी तरीके से निकाह किया और लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया। आरोपी मूल रूप से पीलीभीत जिले के न्यूरिया कस्बे का निवासी है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने आगरा निवासी महिला चिकित्सक का धर्म परिवर्तन कराया था। चौक थाना पुलिस के अनुसार, यह निकाह पीलीभीत के सदर कोतवाली क्षेत्र के फीलखाना मोहल्ले के काजी जाहिद हसन राना द्वारा पढ़वाया गया, जबकि शारिक नामक युवक गवाह बना था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि निकाह के समय न तो आरोपी और न ही पीड़िता पीलीभीत में मौजूद थे, बल्कि केवल फर्जी निकाहनामा तैयार किया गया था।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि फरारी के दौरान डॉ. रमीज मलिक कई डॉक्टरों के संपर्क में था। उसने इस दौरान लाखों रुपये का फंड इकट्ठा किया, जिसका इस्तेमाल वह खुद को बचाने और छिपने के दौरान कर रहा था। पुलिस अब उसके बैंक खातों से हुए लेनदेन की भी गहन जांच कर रही है। इस पूरे मामले में KGMU प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर इस बात को लेकर कि समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।