दिल्ली बॉर्डर के पास गिरफ्तार किए गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन ने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उसने राजधानी के कई कमर्शियल और धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। इन स्थलों में कालकाजी मंदिर, लोटस टेम्पल और छतरपुर मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा, लोन ने कनॉट प्लेस का वीडियो भी पाकिस्तान भेजा था।
लोन ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ISI ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) की तर्ज पर भारत में एक आतंकी संगठन बनाने की योजना बना रहा था। TRF ने पिछले साल पहलगाम में आतंकवादी हमला किया था। जांच में पता चला है कि लोन, लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स आसिफ डार और सुमामा बाबर के साथ लगातार संपर्क में था। आसिफ डार, जो पाकिस्तान में सक्रिय है, टेलीग्राम पर @YD_17 नामक एनक्रिप्टेड हैंडल से गतिविधियों का समन्वय करता था।
लोन ने 21-दिन का बुनियादी प्रशिक्षण ‘दौरा-ए-आम’ पूरा किया और इसके बाद तीन महीने के उन्नत प्रशिक्षण ‘दौरा-ए-खास’ में AK-सीरीज़ राइफलों, रॉकेट लॉन्चर, IED और लाइट मशीन गनों का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उसे मुजफ्फराबाद स्थित शिविर में ‘दौरा-ए-सूफा’ के लिए भेजा गया, जिसमें कट्टर वैचारिक प्रशिक्षण और नई भर्ती शामिल थी।
पाकिस्तान की ISI ने लोन को बांग्लादेश भेजा, ताकि वह वहां से भारत में आतंकी ऑपरेशन के लिए सेल स्थापित कर सके। मार्च 2025 में लोन अपने परिवार के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर बांग्लादेश के सैदपुर में ‘लॉन्चिंग बेस’ बनाकर स्थानीय महिला से शादी कर ली। इसके बाद लोन ने भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बांग्लादेशी और भारतीय युवाओं की भर्ती कर आतंकी गतिविधियों की योजना बनाई।