नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक अहम बयान सामने आया है। मुरिदके में आयोजित एक समारोह के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर अब्दुल रहूफ ने खुले मंच से स्वीकार किया कि भारत द्वारा अंजाम दिए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में संगठन के मुरिदके स्थित प्रशिक्षण केंद्र को गंभीर क्षति पहुंची है।
अपने संबोधन में रहूफ ने कहा कि 6 और 7 मई की रात मुरिदके के शिविर पर जोरदार हमला हुआ। उसने दावा किया कि जिस मस्जिद में पहले संगठन की गतिविधियां चलती थीं, वह पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और अब वहां बैठना भी संभव नहीं है। उसके मुताबिक हमला बेहद ताकतवर था और बहुत कम लोग ही इससे बच पाए।
हमले से पहले शिविर खाली कराने की बात स्वीकारी
लश्कर कमांडर ने यह भी माना कि हमले से कुछ समय पहले ही शिविर में मौजूद नए कमांडरों और कैडरों को दूसरी जगह भेज दिया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान इस ओर संकेत करता है कि भारतीय एजेंसियों को आतंकी ढांचे से जुड़ी सटीक और समय पर खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र की वैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में भारत ने सीमा पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के उद्देश्य से यह लक्षित सैन्य कार्रवाई की।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का आकलन था कि इन हमलों की योजना और ट्रेनिंग पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ठिकानों में दी गई थी। ऑपरेशन के दौरान सीमापार आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिनमें मुरिदके प्रमुख रूप से शामिल था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।