दिल्ली दंगे मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने जेल में बंद शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जबकि पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई।
जमानत पाने वाले आरोपियों में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बताया कि शरजील इमाम और उमर खालिद की स्थिति अन्य आरोपियों की तुलना में अलग है। कोर्ट ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जमानत का मानदंड सख्त होता है। अगर पुलिस के पास उपलब्ध सामग्री प्रथमदृष्टया सही प्रतीत होती है, तो हिरासत प्राथमिकता रहेगी। वहीं, अगर ऐसा नहीं है तो जमानत दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उमर खालिद और शरजील इमाम UAPA की धारा 43D(5) की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष की सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध होते दिख रहे हैं और इस चरण में उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने देश की सुरक्षा और कानून के तहत जमानत के सख्त मानदंडों पर जोर दिया और अलग-अलग आरोपियों के मामलों में विवेकपूर्ण फैसला लिया।