पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, जिसके चलते सभी राजनीतिक दलों ने प्रचार-प्रसार तेज कर दिया है। इसी बीच एक बड़ी घटना सामने आई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है।
दरअसल, राज्य में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कई लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने को लेकर हंगामा हो गया। गुस्साए लोगों ने तीन महिलाओं समेत सात चुनाव अधिकारियों को बंधक बना लिया। स्थिति बिगड़ने पर अर्धसैनिक बल की टुकड़ी को मौके पर बुलाया गया, जिसके बाद अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के डीजीपी और अन्य अधिकारियों से लापरवाही पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें कल रात कड़े ऑर्डर जारी करने पड़े, तब जाकर एडमिनिस्ट्रेशन एक्शन में आया। बंधक बनाई गई अधिकारी का 5 साल का बच्चा है, लेकिन रात 11 बजे तक आपके कलेक्टर वहां नहीं थे। मुझे रात में बोलकर बहुत कड़े ऑर्डर देने पड़े। ऐसे में हम ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की सुरक्षा के लिए कहीं से भी फोर्स बुलाने का काम चुनाव आयोग पर छोड़ते हैं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला रखा। उन्होंने कहा, ‘मुझे अभी टेलीग्राफ से एक रिपोर्ट मिली है।’ इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मैं इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता, लेकिन हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी। शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था। इस पर सिब्बल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अधिकांश अधिकारियों का तबादला राज्य से बाहर कर दिया गया है।
चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, होम सेक्रेटरी का व्यवहार बहुत बुरा- सीजेआई
चीफ जस्टिस ने बताया, “घेराव दोपहर 3:30 बजे शुरू हुआ। रजिस्ट्रार जनरल ने एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी को इन्फॉर्म किया और तुरंत एक्शन लेने को कहा। रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं हुआ। फिर होम सेक्रेटरी से कॉन्टैक्ट किया गया, और डीजीपी ने हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल की। जल्द एक्शन लेने का भरोसा दिया गया, लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया। सीजे ने अपने लेटर में बताया कि न तो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और न ही सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस पहुंचे। सीजे को डीजीपी और होम सेक्रेटरी को बुलाना पड़ा। कल जो घटना हुई, वह इस कोर्ट के अधिकारियों को चुनौती देने की एक बेशर्म कोशिश थी। यह ज्यूडिशियल अधिकारियों का हौसला तोड़ने और प्रोसेस को रोकने की एक सोची-समझी चाल थी। चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, होम सेक्रेटरी का व्यवहार बहुत बुरा है।